लखनऊ पैथोलॉजी मालिक मर्डर केस : बेटी बनी गवाह; बेटे ने पिता को गोली मारकर काटे हाथ-पैर, फिर YouTube से सीखा ‘सबूत मिटाना’
News Affair Team
Sun, Mar 1, 2026
लखनऊ.
“चुप हो जाओ… नहीं तो तुम्हें भी मार दूंगा।”
यह शब्द किसी फिल्म का डायलॉग नहीं, बल्कि उस बेटी की यादों में दर्ज डर है, जिसने अपने ही घर में पिता की हत्या होते देखी।
लखनऊ के आशियाना इलाके में हुए पैथोलॉजी मालिक मानवेंद्र प्रताप सिंह हत्याकांड ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। पुलिस अब मृतक की बेटी कृति को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी में है। क्योंकि वही इस पूरी कहानी की सबसे अहम कड़ी है- वह उस कमरे में मौजूद थी, जहां एक बेटे ने अपने पिता को गोली मारी।
यह सिर्फ हत्या की कहानी नहीं है। यह कहानी है नफरत, डर, चालाकी और सबूत मिटाने की उस कोशिश की, जिसे आरोपी ने YouTube से सीखकर अंजाम दिया।

20 फरवरी की सुबह: जब एक घर में गूंजा था गोली का शोर
20 फरवरी की सुबह, करीब 4:30 बजे। घर में सब सो रहे थे। तभी अचानक गोली चलने की आवाज आई। गोली किसी और ने नहीं, बल्कि मानवेंद्र सिंह के बेटे अक्षत प्रताप सिंह उर्फ राजा ने चलाई थी। गोली सीधे पिता के सिर में लगी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
कमरे में मौजूद बेटी कृति की नींद खुली। सामने का दृश्य देखकर वह रोने लगी। लेकिन अक्षत ने उसे धमकाया- “चुप रहो, नहीं तो तुम्हें भी मार दूंगा।”
डर के साए में कृति चुप हो गई। और इसी चुप्पी ने कई दिनों तक इस हत्या के सच को छिपाए रखा।

हत्या के बाद YouTube बना ‘गाइड’
हत्या करना एक अपराध है। लेकिन हत्या के बाद जो हुआ, उसने पुलिस को भी चौंका दिया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि अक्षत ने शव को ठिकाने लगाने के लिए YouTube पर वीडियो देखे। उसने सीखा कि सबूत कैसे मिटाए जाते हैं।
इसके बाद उसने ऑनलाइन चाकू और आरी मंगाई। फिर उसने अपने पिता के शव के हाथ-पैर काट दिए। कटे हुए अंगों को पॉलिथीन में पैक किया। धड़ को घर में एक नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपा दिया। यह सब उसने अकेले किया।


सबूत मिटाने की पूरी ‘प्लानिंग’
हत्या के बाद अक्षत ने दो दिन तक सबूत मिटाने की कोशिश की।
हाथ-पैर को अलग-अलग जगह फेंका
औजारों को रेलवे ट्रैक के पास फेंका
धड़ छिपाने के लिए कार की साइज का ड्रम खरीदा
मोटी पॉलिथीन और तारपिन का तेल खरीदा
पुलिस अब इन सभी खरीदारी के CCTV फुटेज और बिलिंग डिटेल्स जुटा रही है।
खुद को बेगुनाह दिखाने के लिए 135 कॉल
हत्या के बाद अक्षत ने एक और चाल चली। उसने अलग-अलग लोगों को 135 फोन कॉल किए। मकसद था—खुद को परेशान और बेगुनाह दिखाना।
वह खुद आशियाना थाने पहुंचा और पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की। ताकि पुलिस को शक न हो। लेकिन पुलिस की जांच में यह पूरा ड्रामा बेनकाब हो गया।

बेटी बनी केस की सबसे मजबूत कड़ी
अब इस केस में सबसे अहम किरदार बेटी कृति है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कृति ने पूछताछ में साफ कहा-
“जब भाई ने गोली चलाई, तब मेरी आंख खुली। वही बता सकता है कि पापा की हत्या क्यों हुई।”
कृति ने यह भी बताया कि अक्षत ने उसे धमकाकर कमरे में बंद कर दिया था। पुलिस अब कृति को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी में है। क्योंकि अदालत में उसका बयान इस केस की दिशा तय कर सकता है।
फॉरेंसिक जांच से खुलेगा पूरा सच
इस केस को मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है। हत्या में इस्तेमाल राइफल, कारतूस और मैग्जीन को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
इसके अलावा आरोपी के मोबाइल की कॉल डिटेल्स और CCTV फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हत्या में कोई और शामिल था या नहीं।

रिश्तों में जहर… और हत्या तक पहुंची कहानी
पुलिस जांच और परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, पिता और बेटे के रिश्ते लंबे समय से खराब थे। बताया जा रहा है कि:
बचपन में मां की मौत के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया
पिता के निजी रिश्तों को लेकर विवाद था
पैसों और व्यक्तिगत जीवन को लेकर भी टकराव था
धीरे-धीरे यह दूरी नफरत में बदल गई। और फिर 20 फरवरी की सुबह, इस नफरत ने हत्या का रूप ले लिया।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
24 फरवरी को पुलिस ने अक्षत को गिरफ्तार कर लिया। 25 फरवरी को उसकी निशानदेही पर कटे हुए अंग, हथियार और अन्य सबूत बरामद किए गए।
अब पुलिस चार्जशीट तैयार कर रही है। इस केस में सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या यह हत्या गुस्से में हुई? या पहले से सोची-समझी साजिश थी? जांच जारी है।
लेकिन एक बात साफ है- इस कहानी में सबसे ज्यादा टूटा है भरोसा। एक पिता का भरोसा… और एक बेटी का बचपन।
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