मेरठ के ‘दरोगा गैंग’ का खेल खत्म : एनकाउंटर का डर, रासुका की धमकी और 20 लाख की वसूली… प्रयागराज में दबोचे गए
News Affair Team
Sat, Feb 21, 2026
मेरठ.
मेरठ में कहानी फिल्मी है, लेकिन किरदार असली। वर्दी भी असली। और डर भी असली। आरोप है कि दो दरोगाओं ने ‘एनकाउंटर’ और ‘रासुका’ का डर दिखाकर एक धागा कारोबारी से 20 लाख रुपये वसूल लिए। मामला खुला तो दोनों दरोगा फरार हो गए। 10 दिन तक पुलिस को चकमा देते रहे। लेकिन आखिरकार प्रयागराज में वकील के चेंबर से गिरफ्तार कर लिए गए।
आरोपी दरोगाओं के नाम हैं—लोकेंद्र साहू और महेश गंगवार। दोनों मेरठ के लोहियानगर थाने में तैनात थे।
वकील से मिलने पहुंचे… और वहीं घिर गए
मेरठ पुलिस को इनपुट मिला कि दोनों दरोगा प्रयागराज में एक वकील से मिलने आने वाले हैं। प्लान था—हाईकोर्ट में अपील कर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश।
सूचना मिलते ही मेरठ पुलिस की टीम प्रयागराज पहुंच गई। शुक्रवार शाम जैसे ही दोनों दरोगा वकील के चेंबर में दाखिल हुए, पुलिस ने घेराबंदी कर दी।
भागने की कोशिश हुई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। दौड़ाकर पकड़े गए।

‘तुझे एनकाउंटर में मार देंगे… रासुका लगा देंगे’
कहानी शुरू होती है 8 दिसंबर से। मेरठ के इस्लामाबाद रिक्शा रोड निवासी रासिख (बदला हुआ नाम), जिनकी फर्म एमएसआरएस टेक्सटाइल है, अपनी दुकान से लौट रहे थे। नौचंदी के पास आजाद रोड पर अचानक एक कार आकर रुकी।
कार से दो दरोगा उतरे। आरोप है कि कारोबारी को जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया।
धमकी— “फंडिंग करता है। हवाला से पैसा मंगाता है। रासुका लगाकर अंदर कर देंगे। एनकाउंटर में भी निपटा सकते हैं।”
कारोबारी को मेरठ से हापुड़ ले जाया गया। रास्तेभर कथित तौर पर मारपीट और टॉर्चर। कारोबारी का कहना है कि हालत बिगड़ने लगी थी।
जंगल में वीडियो… 50 लाख की डिमांड
आरोप है कि हापुड़ से लौटते वक्त कारोबारी को अल्लीपुर के जंगल ले जाया गया। वहां जबरन वीडियो बनवाया गया, जिसमें वह खुद पर लगे आरोप “कबूल” करता दिखे।
फिर डिमांड आई—50 लाख रुपये। कारोबारी ने कहा कि इतनी बड़ी रकम का इंतजाम संभव नहीं। तब सौदा 20 लाख पर तय हुआ।
14 लाख कैश… फिर 6 लाख… फिर 1 लाख और
कारोबारी ने अपने बहनोई नईम को फोन किया। थोड़ी देर में 14 लाख रुपये कैश लेकर पहुंचे। बैग दरोगाओं को थमा दिया गया।
6 लाख की व्यवस्था अगले दिन करने की बात हुई। कारोबारी के मुताबिक, अगले दिन 6 लाख रुपये और दिए गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
दरोगाओं ने कहा— “कल 14 नहीं, 13 लाख लाए थे। एक लाख और दो।”
नौचंदी मैदान में बुलाया गया। वहां 1 लाख रुपये और लिए गए।
‘मुंह खोला तो दिल्ली ब्लास्ट में फंसा देंगे’
कारोबारी का आरोप है कि दरोगाओं ने धमकी दी— “अगर मुंह खोला तो दिल्ली ब्लास्ट केस में फंसा देंगे। जिंदगी भर जेल में सड़ेगा। परिवार को भी चैन से नहीं जीने देंगे।”
साथ ही चेतावनी— “जो वीडियो बनाया है, वायरल कर देंगे।” डर इतना था कि कारोबारी कुछ दिन चुप रहा।
एसपी सिटी के पास पहुंचा मामला
आखिरकार कारोबारी ने हिम्मत की और मेरठ के एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह के दफ्तर पहुंच गया। पूरी घटना बताई। मामला सीनियर अधिकारियों तक गया।
बताया जाता है कि शुरुआती जांच में दरोगाओं को भरोसे में लेकर कहा गया—अगर पैसा वापस कर दो तो कार्रवाई नहीं होगी।
इसके बाद 14 लाख रुपये किसी के जरिए वापस कराए गए। जैसे ही पुष्टि हुई, 6 फरवरी को दोनों दरोगाओं के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई। FIR होते ही दोनों फरार।
10 दिन की फरारी… फिर गिरफ्तारी
करीब 10 दिन तक दोनों पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। फिर इनपुट मिला कि वे प्रयागराज में हाईकोर्ट में राहत लेने की तैयारी में हैं।
टीम पहुंची। वकील के चेंबर में दबिश। और ‘दरोगा गैंग’ का खेल खत्म।
बड़ा सवाल: वर्दी में वसूली?
यह मामला सिर्फ दो दरोगाओं की गिरफ्तारी भर नहीं है। सवाल सिस्टम पर भी है।
क्या एनकाउंटर का डर इतना बड़ा हथियार बन चुका है?
क्या रासुका जैसी कड़ी धाराओं का नाम लेकर किसी को भी डरा देना आसान है?
और अगर कारोबारी हिम्मत न करता तो क्या यह खेल चलता रहता?
मेरठ पुलिस अब आगे की जांच में जुटी है। दोनों दरोगाओं से पूछताछ होगी। कथित वसूली की रकम और अन्य संभावित मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।
अभी आगे क्या?
दोनों दरोगाओं को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
विभागीय जांच भी तय मानी जा रही है।
यह भी जांच होगी कि क्या और लोग इस नेटवर्क में शामिल थे।
कहानी फिलहाल गिरफ्तारी तक पहुंची है। लेकिन असली कहानी अब शुरू होगी—कोर्ट में।
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