ब्रिटेन 400 साल की गुलामी के लिए माफी मांगने को तैयार : PM बर्नहम बोले- लेकिन मुआवजा नहीं देंगे; थरूर ने भारत की लूट का मुद्दा उठाया
लंदन.
ब्रिटेन अपने इतिहास के उस अध्याय पर औपचारिक माफी मांगने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जिसमें उसने सदियों तक अफ्रीकी लोगों को गुलाम बनाकर बेचा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा है कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर गुलामी से प्रभावित देशों और संगठनों के साथ बातचीत शुरू करेगी। उन्होंने ब्रिटिश राज्य की ओर से औपचारिक माफी की मांगों पर विचार करने की बात भी कही है।
हालांकि, बर्नहम ने आर्थिक मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया। उनका तर्क है कि आज की ब्रिटिश पीढ़ी को सैकड़ों साल पहले हुए अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके बजाय ब्रिटेन गरीब कॉमनवेल्थ देशों को कर्ज चुकाने में राहत देने की योजना पर काम करेगा।
बर्नहम ने शुक्रवार को ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' में प्रकाशित लेख में अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कैरेबियाई देश गुलामी के इतिहास को लेकर ब्रिटेन से माफी और मुआवजे की मांग तेज कर रहे हैं।

PM बोले- आज की पीढ़ी को पुराने अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते
बर्नहम ने अपने लेख में कहा कि ट्रांसअटलांटिक गुलामी का व्यापार मानवता के साथ क्रूर अन्याय था। इससे लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई और इसका असर आज भी दुनिया में दिखाई देता है। उन्होंने पीड़ितों के दर्द और तकलीफ पर दुख जताते हुए कहा कि ब्रिटेन इस इतिहास को स्वीकार करने और प्रभावित पक्षों से बातचीत के लिए तैयार है।
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मौजूदा ब्रिटिश नागरिकों को उन ऐतिहासिक गलतियों के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता, जिनमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी।
आर्थिक मुआवजे के बजाय ब्रिटेन गरीब कॉमनवेल्थ देशों के कर्ज का बोझ कम करने की पहल करेगा। इस योजना की अगुवाई पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन करेंगे। इसके तहत देशों को कर्ज चुकाने के लिए अधिक समय और कम ब्याज दरों की सुविधा दिलाने की कोशिश होगी। ब्रिटेन इन देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में भी सहयोग देगा।
ब्रिटेन ने 32 लाख अफ्रीकी लोगों को गुलाम बनाकर बेचा
ट्रांसअटलांटिक स्लेव ट्रेड डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन ने करीब 32 लाख अफ्रीकी लोगों को अटलांटिक महासागर के पार ले जाकर गुलामी के लिए बेचा था। यूरोपीय देशों ने मिलकर 1.25 करोड़ से ज्यादा अफ्रीकी लोगों को पकड़कर गुलामी के व्यापार में धकेला।
ब्रिटेन ने 1807 में गुलामों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई। इसके बाद 1833 में गुलामी खत्म करने का कानून बनाया गया, जो 1834 से लागू हुआ। हालांकि, गुलाम बनाए गए लोगों को पूरी आजादी मिलने में 1838 तक का समय लगा।
गुलामी खत्म होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने पीड़ितों को नहीं, बल्कि गुलामों के मालिकों को मुआवजा दिया था। सरकार ने मालिकों को 2 करोड़ पाउंड दिए थे। यह उस समय ब्रिटेन के सालाना बजट का करीब 40% था। इस भुगतान के लिए सरकार ने कर्ज लिया, जिसे चुकाने में 2015 तक का समय लगा।
गुलामी खत्म होने के बाद भारत से 20 लाख मजदूर विदेश भेजे गए
गुलामी की व्यवस्था खत्म होने के बाद ब्रिटेन के उपनिवेशों में खेतों और बागानों में काम करने वाले मजदूरों की कमी हो गई। इसे पूरा करने के लिए भारत से बड़ी संख्या में मजदूरों को दूसरे देशों में भेजा गया। इस व्यवस्था को इंडेंचर्ड लेबर सिस्टम कहा जाता था।
1838 से 1917 के बीच करीब 20 लाख भारतीयों को कैरेबियाई देशों और दक्षिण अफ्रीका सहित ब्रिटिश उपनिवेशों में काम करने के लिए भेजा गया। इनमें से कई मजदूरों को काम की वास्तविक शर्तों की जानकारी नहीं दी गई थी। उन्हें कम मजदूरी पर खेतों और बागानों में काम करना पड़ा।
थरूर बोले- भारत में हुई लूट और अत्याचारों के लिए भी माफी मांगे ब्रिटेन
कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर ने बर्नहम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्रिटेन को सिर्फ अफ्रीकी गुलामी के लिए ही नहीं, बल्कि भारत में किए गए अत्याचारों और आर्थिक लूट के लिए भी माफी मांगनी चाहिए।
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई लूट, तबाही और लोगों की मौतों के लिए अब तक माफी नहीं मांगना शर्मनाक है। उन्होंने 'द हिंदू' से बातचीत में कहा कि भारत को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कोई भी रकम पर्याप्त नहीं हो सकती, लेकिन ब्रिटेन को अपनी ऐतिहासिक गलतियों को स्वीकार करना चाहिए।

थरूर इससे पहले भी सुझाव दे चुके हैं कि ब्रिटेन भारत को 200 साल तक हर साल एक पाउंड का प्रतीकात्मक मुआवजा दे। उनके मुताबिक, यह रकम से ज्यादा ऐतिहासिक गलतियों को स्वीकार करने का सवाल है।
किंग चार्ल्स ने माना- अतीत में लोगों के साथ बहुत अन्याय हुआ
ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स इन दिनों कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। बहामास में उन्होंने कहा कि अतीत में लोगों को बहुत दुख झेलना पड़ा और उनके साथ अन्याय हुआ। हालांकि, उन्होंने ब्रिटेन की ओर से औपचारिक माफी नहीं मांगी।

बकिंघम पैलेस का कहना है कि माफी मांगने का फैसला चुनी हुई सरकार को करना है। वहीं, बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली ने बर्नहम के बयान का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कैरेबियाई देश गुलामी के लिए आर्थिक मुआवजे की मांग जारी रखेंगे।
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