CM भगवंत मान, फोर्टिस और ‘1 बजकर 11 मिनट’ की धमकी : मेल में पोलोनियम, बेअंत और बम; पंजाब हाई अलर्ट पर
चंडीगढ़.
पंजाब की राजनीति में सोमवार दोपहर अचानक एक ऐसा ‘नोटिफिकेशन’ गिरा, जिसने सिस्टम को झकझोर दिया। भगवंत मान जिस अस्पताल में भर्ती हैं—मोहाली का Fortis Hospital—उसे 1 बजकर 11 मिनट पर बम से उड़ाने की धमकी का ई-मेल मिला। मेल भेजने वाले ने खुद को ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ बताया और CM को लेकर सनसनीखेज दावा किया—“भाई दिलावर सिंह के वारिसों ने उन्हें पोलोनियम से संक्रमित किया है… अगर बच गए तो बेअंत जैसा हाल करेंगे।”
नाम आया तो इतिहास भी साथ आया। पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह की हत्या 1995 में चंडीगढ़ सचिवालय में मानव बम हमले में हुई थी। उसी ‘बेअंत’ का हवाला देकर धमकी को और भयावह बनाया गया। हालांकि यह दावा कैसे, कब और कहां ‘संक्रमण’ हुआ—इस पर मेल में कोई विवरण नहीं है।
अस्पताल बना किला, 5 बम निरोधक दस्ते तैनात
धमकी मिलते ही पंजाब पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं। अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया गया। पांच बम निरोधक दस्ते एक्टिव कर दिए गए। एंटी-रॉयट टीमें गेट पर, रोड पर मोहाली पुलिस—और अंदर CM सिक्योरिटी का कंट्रोल।
मोहाली के SP दिलप्रीत सिंह ने कहा—“CM को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की कोई योजना नहीं है। सभी टीमें अलर्ट हैं।” अस्पताल में सामान्य आवाजाही रोक दी गई। मरीज अपने-अपने वार्ड में हैं, स्टाफ की एंट्री ID और चेकिंग के बाद ही हो रही है।
CM जिस फ्लोर पर भर्ती हैं, उसके आसपास का एरिया खाली करा दिया गया है। जैसे-जैसे 1:11 PM नजदीक आया, चेकिंग और सघन होती गई। सिस्टम की भाषा में कहें तो ‘प्रोटोकॉल ऑन फुल मोड’।
CM की तबीयत—रैली से अस्पताल तक
जानकारी के मुताबिक, CM पहले रविवार को ब्लड प्रेशर बढ़ने पर भर्ती हुए थे। सोमवार को डिस्चार्ज होकर मोगा में AAP की नशा-विरोधी रैली में गए। वहां सांस लेने में तकलीफ होने पर शाम करीब 5 बजे फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल की ओर से स्वास्थ्य बुलेटिन जारी नहीं हुआ है।
यानी एक तरफ तबीयत की चिंता, दूसरी तरफ बम की धमकी—दोनों ने मिलकर माहौल को असामान्य बना दिया।

मेल में क्या-क्या लिखा?
‘हंटर फार्ले’ नाम से जीमेल के जरिए भेजे गए ई-मेल में पंजाब को ‘खालिस्तान’ बताया गया। लिखा गया—“अपने बच्चे बचा लो, मोहाली के स्कूल बंद रखो।” साथ ही दावा—यह खालिस्तान रेफरेंडम समर्थकों को ‘गैंगस्टर’ बताकर एनकाउंटर करने का बदला है।
मेल के अंत में ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ का नाम, और कुछ व्यक्तियों के नाम—इंजीनियर गुरनाख सिंह, रुकन शाहवाला, डॉ. गुरनिरवीर सिंह और खान राजादा—लिखे गए। इन नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
धमकी सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं रही। मोहाली के 16 स्कूलों को भी मेल मिला, जिसके बाद छुट्टी कर दी गई।
पहले भी आईं धमकियां—ज्यादातर निकलीं फर्जी
अमृतसर, जालंधर, पटियाला, मोहाली और चंडीगढ़ के स्कूलों को पहले भी बम धमकी के ई-मेल मिल चुके हैं। हर बार जांच के बाद कुछ नहीं मिला। लेकिन इस बार मामला अलग है—क्योंकि टारगेट एक मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। इसलिए जांच एजेंसियां इसे ‘रूटीन’ मानकर नहीं चल रहीं।
पोलोनियम—नाम सुनते ही डर क्यों लगता है?
मेल में सबसे चौंकाने वाला शब्द था—पोलोनियम। खास तौर पर पोलोनियम-210। इसे दुनिया के सबसे घातक रेडियोएक्टिव जहरों में गिना जाता है। यह अल्फा विकिरण उत्सर्जित करता है।
अगर शरीर में खाने, पीने या सांस के जरिए पहुंच जाए, तो अंदरूनी अंगों और DNA को नुकसान पहुंचा सकता है। शुरुआती लक्षण—उल्टी, दस्त, कमजोरी—हो सकते हैं। इसका कोई आसान एंटीडोट नहीं माना जाता।
हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे किसी दावे की पुष्टि मेडिकल जांच के बिना संभव नहीं। अभी तक अस्पताल या सरकार की ओर से ‘पोलोनियम संक्रमण’ की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल धमकी का हिस्सा ही माना जा रहा है।
‘1 बजकर 11 मिनट’—टाइमर की मनोवैज्ञानिक चाल?
धमकी में खास समय दिया गया—1:11 PM। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे समय-विशिष्ट मैसेज अक्सर दहशत फैलाने के लिए होते हैं। समय नजदीक आते ही अफरा-तफरी बढ़ती है, संसाधन खपते हैं, और डर का असर कई गुना हो जाता है।
लेकिन पुलिस का काम है—डर से पहले जांच। इसलिए अस्पताल परिसर, पार्किंग, आसपास की इमारतें—सबकी सघन तलाशी ली गई। CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। साइबर सेल ई-मेल की IP ट्रेसिंग में जुटी है।
राजनीति, सुरक्षा और सोशल मीडिया—तीनों का त्रिकोण
जैसे ही खबर बाहर आई, सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करने लगे। किसी ने इसे ‘साजिश’ कहा, किसी ने ‘साइबर शरारत’। राजनीतिक बयान भी आने लगे—सरकार की सुरक्षा पर सवाल, विपक्ष की प्रतिक्रिया, और समर्थकों की चिंता।
पर असली सवाल जांच का है—क्या यह सिर्फ धमकी है? या किसी बड़े नैरेटिव की कोशिश?
पंजाब ने आतंकवाद का दौर देखा है। इसलिए यहां सुरक्षा एजेंसियां ‘ओवर-रिएक्ट’ करने से भी नहीं हिचकतीं। क्योंकि इतिहास सिखाता है—एक चूक भारी पड़ सकती है।
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