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पाकिस्तान-अफगानिस्तान में ‘जंग जैसे हालात’ : 300 से ज्यादा मौतें, ड्रोन; एयरस्ट्राइक और ट्रम्प की एंट्री

News Affair Team

Sat, Feb 28, 2026

इंटरनेशनल डेस्क.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान। दो पड़ोसी। दो मुस्लिम देश। लेकिन इस वक्त हालात ऐसे हैं जैसे दोनों दोस्त नहीं, बल्कि दुश्मन हों। बॉर्डर पर गोलियां चल रही हैं, आसमान में फाइटर जेट उड़ रहे हैं, और जमीन पर टैंक गरज रहे हैं।

कुल मिलाकर, अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत और 500 से ज्यादा घायल होने की खबर है। दोनों देश एक-दूसरे को खुली धमकी दे रहे हैं—“अगर हमला हुआ, तो जवाब और बड़ा होगा।” और इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस कहानी में आ गए हैं।

कहानी की शुरुआत: एक एयरस्ट्राइक, जिसने आग लगा दी

इस पूरी लड़ाई की शुरुआत 22 फरवरी को हुई। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान के अंदर मौजूद TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की।

पाकिस्तान का कहना था—ये आतंकी संगठन उसकी जमीन पर हमले कर रहे हैं और अफगानिस्तान में छिपे हुए हैं।

लेकिन अफगानिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया। तालिबान सरकार ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने आतंकियों के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक हमले में एक ही परिवार के 23 लोग मारे गए।

तालिबान ने उसी वक्त कहा था—“जवाब सही समय पर दिया जाएगा।” और वही हुआ।

जवाब में अफगानिस्तान का हमला, फिर पाकिस्तान का ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’

गुरुवार देर रात अफगानिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया, जिसका नाम दिया—ऑपरेशन गजब-लिल-हक। पाकिस्तानी एयरफोर्स ने काबुल, कंधार, पक्तिया और नंगरहार जैसे कई इलाकों में एयरस्ट्राइक की।

पाकिस्तान का दावा है कि—

  • 274 तालिबान लड़ाके मारे गए

  • 400 से ज्यादा घायल हुए

  • 115 टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां नष्ट

  • 74 सैन्य चौकियां तबाह

  • 18 चौकियों पर कब्जा

लेकिन तालिबान की कहानी अलग है। तालिबान का कहना है कि उसके सिर्फ 8 से 13 लड़ाके मारे गए, जबकि उसने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और कई चौकियों पर कब्जा कर लिया। यानी, दोनों देश अपनी-अपनी जीत की कहानी सुना रहे हैं।

ड्रोन की एंट्री: आसमान से हमला, जमीन पर डर

इस लड़ाई में अब ड्रोन भी शामिल हो गए हैं। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान के अंदर ड्रोन से सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

वहीं पाकिस्तान ने कहा कि एबटाबाद, स्वाबी और नौशेरा में ड्रोन गिराए गए और बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन एक पूर्व पाकिस्तानी सेना अधिकारी ने दावा किया कि ड्रोन ने इस्लामाबाद के पास एक न्यूक्लियर एनर्जी सेंटर को निशाना बनाया।

हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि ड्रोन के इस्तेमाल ने इस संघर्ष को और खतरनाक बना दिया है।

पाकिस्तान में हाई अलर्ट: ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह बैन

ड्रोन हमलों के बाद पाकिस्तान सरकार ने बड़ा फैसला लिया। पूरे देश में निजी ड्रोन उड़ाने पर तुरंत रोक लगा दी गई। सरकार को डर है कि ड्रोन का इस्तेमाल सैन्य ठिकानों और संवेदनशील इलाकों पर हमले के लिए हो सकता है।

इसका मतलब साफ है—पाकिस्तान इस संघर्ष को हल्के में नहीं ले रहा।

संसद से लेकर सेना मुख्यालय तक: पाकिस्तान का सख्त रुख

पाकिस्तान की संसद ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद सेना मुख्यालय पहुंचे और कहा—“उकसावे पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।”

पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने तालिबान सरकार को गैर-कानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीने जा रहे हैं। यानी, अब ये लड़ाई सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक भी हो गई है।

पाकिस्तान का आरोप: ‘भारत की भूमिका’

इस संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने एक और बड़ा आरोप लगाया है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि देश में हो रहे आतंकी हमलों के पीछे भारत की भूमिका है और इसके लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल हो रहा है।

हालांकि भारत की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन ये आरोप इस संघर्ष को और जटिल बना देते हैं।

ट्रम्प की एंट्री: “मैं दखल दे सकता हूं”

जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से पूछा गया कि क्या अमेरिका इस संघर्ष में दखल देगा, तो उनका जवाब दिलचस्प था।

उन्होंने कहा—

“मैं दखल दे सकता हूं, लेकिन मेरे पाकिस्तान से बहुत अच्छे रिश्ते हैं। पाकिस्तान इस समय अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।”

इस बयान का मतलब साफ नहीं है—क्या अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन करेगा या दोनों के बीच मध्यस्थ बनेगा। लेकिन इतना तय है कि अमेरिका की नजर इस संघर्ष पर है।

पुराना विवाद: डूरंड लाइन की कहानी

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव नया नहीं है। दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। अफगानिस्तान कभी इस सीमा को पूरी तरह स्वीकार नहीं करता, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है।

2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से तनाव और बढ़ गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP जैसे आतंकी संगठन अफगानिस्तान से ऑपरेट कर रहे हैं। तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

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