रोबोट ‘ओरियन’ निकला ‘गो2’ : AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पवेलियन सील; बिजली काटी, लगा ताला
नईदिल्ली.
दिल्ली में चल रहे India AI Impact Summit & Expo में जो होना था टेक्नोलॉजी का जलवा, वहां बन गया टेक्नोलॉजी का झमेला। कहानी ऐसी कि पहले रोशनी बुझी, फिर ताला लगा, और फिर बैरिकेडिंग। जी हां, ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पवेलियन समिट से बाहर कर दिया गया।
कार्रवाई इतनी सख्त कि आयोजकों ने पहले बिजली काटी, फिर स्टॉल पर ताला जड़ दिया। वजह? एक वायरल वीडियो। वीडियो में यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर दिखाया गया रोबोटिक डॉग और ड्रोन असल में उनके “इन-हाउस प्रोजेक्ट” नहीं, बल्कि विदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट निकले।

वीडियो वायरल, और फिर बवाल
वीडियो में प्रोफेसर नेहा सिंह एक रोबोटिक डॉग को ‘ओरियन’ नाम से पेश कर रही थीं। दावा—इसे यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। साथ में 350 करोड़ रुपए के AI निवेश का जिक्र भी।
लेकिन टेक एक्सपर्ट्स ने वीडियो को गौर से देखा। कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर दावा हुआ कि यह डॉग असल में चीनी कंपनी Unitree Robotics का मॉडल है—Unitree Go2।
यही नहीं, जिस ड्रोन को ‘कैंपस में शुरुआत से तैयार’ बताया गया, उसे यूजर्स ने कोरियन कंपनी के रेडीमेड मॉडल ‘स्ट्राइककर V3 ARF’ के तौर पर पहचान लिया। कीमत? करीब 40 हजार रुपए।
आयोजकों का एक्शन: बिजली गुल, ताला फुल
वीडियो वायरल होते ही समिट आयोजकों ने तुरंत संज्ञान लिया। पहले पवेलियन की बिजली काटी गई। फिर स्टॉल पर ताला लगा दिया गया। और उसके बाद बैरिकेडिंग।
टेक्नोलॉजी के सबसे बड़े मंच पर ऐसा कदम कम ही देखने को मिलता है। संदेश साफ था—फैक्ट्स में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी।

यूनिवर्सिटी की सफाई: “हमने बनाया नहीं, दिखाया है”
विवाद बढ़ा तो यूनिवर्सिटी ने माफी जारी की। कहा—स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि को प्रोडक्ट की पूरी जानकारी नहीं थी। कैमरे के सामने जोश में कुछ गलत टेक्निकल बातें कह दीं।
यूनिवर्सिटी ने बयान में माना कि रोबोटिक डॉग उन्होंने नहीं बनाया। वह हाल ही में खरीदा गया था ताकि छात्र उस पर रिसर्च कर सकें।
उनका कहना—
“यह चलता-फिरता क्लासरूम है। हम दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाते हैं ताकि छात्र सीख सकें।”
मतलब, दावा ‘निर्माण’ का नहीं, ‘अध्ययन’ का था। लेकिन वीडियो में जो कहा गया, वही विवाद की जड़ बना।
प्रोफेसर नेहा सिंह बोलीं—“जोश में बात साफ नहीं कह पाई”
वीडियो में दिख रहीं प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा कि उन्होंने बात स्पष्ट नहीं रखी।
“मैं इसकी जिम्मेदारी लेती हूं। सब बहुत जल्दी-जल्दी और उत्साह में हुआ।”
लेकिन सवाल वही—क्या टेक्नोलॉजी समिट जैसे मंच पर इतनी बड़ी चूक सिर्फ ‘जोश’ से हो सकती है?
एक्स का ‘कम्युनिटी नोट’ भी आया मैदान में
यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि उन्होंने कभी इसे अपना निर्माण नहीं बताया। लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के नीचे ‘कम्युनिटी नोट’ जुड़ गया।
कम्युनिटी नोट में यूजर्स ने फैक्ट-चेक कर बताया कि वीडियो में साफ तौर पर ‘तैयार किया गया’ कहा गया था। यानी, डिजिटल जनता ने भी इस दावे को चुनौती दी।

विपक्ष का हमला: “देश की इमेज खराब”
कांग्रेस ने इसे भारत की छवि से जोड़ा। बयान आया कि सरकार ने AI के नाम पर दुनिया में देश का मजाक बनवाया।
नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने कहा कि यह समिट “डिसऑर्गनाइज्ड पीआर स्पेक्टेकल” बन गया है।
कांग्रेस का आरोप—
“मोदी सरकार AI के नाम पर शोबाजी कर रही है। असली टैलेंट और डेटा का इस्तेमाल नहीं हो रहा।”
यहां तक कहा गया कि केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw भी इस झूठ को प्रमोट कर रहे थे।
नॉलेज बॉक्स: आखिर क्या है ‘Go2’?
Unitree Go2 एक AI-पावर्ड रोबोटिक डॉग है। इसे चीनी कंपनी Unitree Robotics बनाती है।
इसमें 4D LiDAR टेक्नोलॉजी
सीढ़ियां चढ़ने और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने की क्षमता
वॉयस कमांड सपोर्ट
कीमत लगभग 2–3 लाख रुपए
दुनियाभर में इसका इस्तेमाल रिसर्च और एजुकेशन में होता है।
Unitree रोबोटिक डॉग और ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने के लिए जानी जाती है। कंपनी एडवांस सेंसर टेक्नोलॉजी पर काम करती है।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी: बैकग्राउंड क्या है?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना 2011 में हुई थी।
ग्रेटर नोएडा स्थित इस निजी विश्वविद्यालय में 200 से ज्यादा कोर्स चलाए जाते हैं—डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक।
चांसलर हैं सुनील गलगोटिया और CEO ध्रुव गलगोटिया।
यूनिवर्सिटी ने पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर खास फोकस दिखाया है। लेकिन इस घटना ने उनकी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
AI समिट की साख पर असर?
दिल्ली में चल रहे इस AI समिट में 100 से ज्यादा टेक कंपनियों के CEO और 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। उद्देश्य था—भारत को AI हब के रूप में पेश करना।
लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इस एक घटना से पूरे आयोजन की साख प्रभावित होगी?
AI जैसे संवेदनशील और हाई-टेक क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सबसे अहम है। अगर किसी प्रोडक्ट को ‘मेड इन इंडिया’ बताकर पेश किया जाए और वह ‘मेड इन चाइना’ निकले, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर संदेश अच्छा नहीं जाता।
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