कोर्ट ने रोका… ट्रम्प ने ठोका : 3 घंटे में 10% ग्लोबल टैरिफ; अमेरिका में ‘टैरिफ वॉर’ पार्ट-2 शुरू
वाशिंगटन डीसी.
अमेरिका में शुक्रवार को ऐसा सीन बना, जो किसी पॉलिटिकल थ्रिलर से कम नहीं था। सुबह सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के टैरिफ को “अवैध” बता दिया। और शाम होते-होते राष्ट्रपति ने नया आदेश साइन कर दिया—पूरी दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ।
जी हां, कोर्ट के फैसले के सिर्फ तीन घंटे के भीतर राष्ट्रपति Donald Trump ने नया दांव चला और 24 फरवरी से 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने का ऐलान कर दिया।
तो सवाल ये—कोर्ट जीता या ट्रम्प? और इसका असर भारत समेत दुनिया पर क्या होगा? समझते हैं पूरी कहानी, लल्लनटॉप स्टाइल में।

पहले कोर्ट का झटका
शुक्रवार को Supreme Court of the United States ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा— संविधान के मुताबिक टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि कांग्रेस (संसद) के पास है।
मतलब साफ—राष्ट्रपति सीधे ग्लोबल टैरिफ नहीं ठोक सकते। कोर्ट ने ट्रम्प के पहले लगाए गए टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया।
और फिर ट्रम्प का पलटवार
कोर्ट का फैसला आया। कैमरे ऑन हुए। और ट्रम्प बोले—
“बहुत निराशाजनक है। कुछ जजों पर मुझे शर्म आती है। उनमें देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।”
उन्होंने जजों को “कट्टर वामपंथियों के पालतू” तक कह दिया।
लेकिन बात सिर्फ बयान तक नहीं रही। उन्होंने तुरंत नया आदेश साइन कर दिया—
सेक्शन 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ।
सेक्शन 122 क्या बला है?
यह “ट्रेड एक्ट 1974” का हिस्सा है। इसके तहत अगर अमेरिका को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो राष्ट्रपति अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं।
बिना लंबी जांच प्रक्रिया
अधिकतम 150 दिन तक
बाद में समीक्षा
मतलब—कोर्ट ने एक दरवाजा बंद किया, ट्रम्प ने दूसरा खोल लिया।

भारत पर क्या असर?
व्हाइट हाउस के मुताबिक जिन देशों ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किए हैं—जैसे भारत, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन—उन्हें भी 10% टैरिफ देना होगा।
पहले भारत पर औसतन 18% टैरिफ लग रहा था। अब वह घटकर 10% हो जाएगा।
ट्रम्प ने साफ कहा—
“भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 बड़ी बातें
टैरिफ लगाने के लिए मुझे संसद की जरूरत नहीं।
रिफंड पर कोर्ट ने साफ नहीं कहा, इसलिए पैसा वापस नहीं होगा।
केस अगले 5 साल तक कोर्ट में चल सकता है।
विदेशी ताकतों का असर फैसले पर पड़ा है।
टैरिफ पहले के राष्ट्रपतियों को लगा देना चाहिए था।
ट्रम्प का टोन साफ था—“मैं पीछे हटने वाला नहीं।”
कोर्ट ने क्या कहा था?
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी की थी— “अमेरिका दुनिया के हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं है।”
तीन जजों— Samuel Alito, Clarence Thomas और Brett Kavanaugh ने फैसले से असहमति जताई।
कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन कानूनी तौर पर इसे वैध माना जा सकता है।

200 अरब डॉलर का सवाल
The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन अब तक 200 अरब डॉलर से ज्यादा टैरिफ वसूल चुका है।
अब बड़ा सवाल— क्या कंपनियों को यह पैसा वापस मिलेगा?
ट्रम्प साफ कह चुके हैं—“कोई रिफंड नहीं।”
इतिहास का फ्लैशबैक: निक्सन वाला 10%
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। 1971 में Richard Nixon ने भी 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। तब अमेरिका भारी व्यापार घाटे से जूझ रहा था।
उसके बाद 1974 में ट्रेड एक्ट आया, ताकि भविष्य में राष्ट्रपति के पास कानूनी विकल्प रहे। लेकिन सेक्शन 122 का इतना बड़ा इस्तेमाल पहले कभी नहीं हुआ।
कौन-कौन से टैरिफ खत्म हुए?
कोर्ट के फैसले से सब टैरिफ खत्म नहीं हुए। स्टील और एल्युमिनियम पर लगे टैरिफ अभी भी लागू हैं।
लेकिन दो बड़े कैटेगरी रद्द हुए—
चीन पर 34% और बाकी दुनिया पर 10% रेसिप्रोकल टैरिफ
कनाडा, चीन, मैक्सिको पर 25% टैरिफ (फेंटेनाइल विवाद के नाम पर)
अब नई 10% दर सब पर बराबर लागू होगी।
कानूनी पेंच: IEEPA बनाम कांग्रेस
ट्रम्प ने पहले “इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA)” का सहारा लिया था। यह 1977 का कानून है।
कोर्ट ने पूछा—
IEEPA में “टैरिफ” शब्द कहां लिखा है? और अगर टैरिफ टैक्स की तरह है, तो क्या कांग्रेस की मंजूरी जरूरी नहीं? यही कानूनी जंग अब आगे भी चलेगी।
12 राज्यों का मुकदमा
एरिजोना से लेकर न्यूयॉर्क तक 12 राज्यों ने ट्रम्प के खिलाफ केस किया था। छोटे कारोबारी भी साथ थे।
उनका तर्क था—राष्ट्रपति ने अपनी सीमा पार की है। निचली अदालतों ने भी टैरिफ को गैरकानूनी कहा था। लेकिन अब मामला नए मोड़ पर है।
आगे क्या?
क्या सेक्शन 122 को भी कोर्ट में चुनौती मिलेगी?
क्या 10% टैरिफ 150 दिन से आगे बढ़ेगा?
क्या कंपनियां रिफंड के लिए नई याचिका डालेंगी?
और सबसे अहम—क्या यह अमेरिका में “टैरिफ बनाम संविधान” की लंबी जंग बन जाएगी?
एक बात साफ है— ट्रम्प ने संदेश दे दिया है कि वे आर्थिक राष्ट्रवाद की लाइन से हटने वाले नहीं।
कोर्ट ने ब्रेक लगाया। ट्रम्प ने गियर बदला।
अब देखना ये है कि यह टैरिफ वॉर कहां जाकर रुकती है—कोर्ट में, कांग्रेस में या फिर दुनिया की अर्थव्यवस्था में।
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