छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई और सूर्यकांत तिवारी को दी अंतरिम जमानत राज्य में रहने पर पाबंद
नई दिल्ली/रायपुर.
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले में जेल में बंद वरिष्ठ अफसरों और नेताओं को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई और सूर्यकांत तिवारी को अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि, जमानत कड़ी शर्तों के साथ दी गई है और आरोपियों को छत्तीसगढ़ में रहने की अनुमति नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त शर्तें
जस्टिस सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि:
आरोपी अगले आदेश तक छत्तीसगढ़ राज्य में नहीं रह सकेंगे।
रिहाई के एक सप्ताह के भीतर उन्हें राज्य से बाहर अपने निवास का पता थाने और जांच एजेंसी को बताना होगा।
पासपोर्ट विशेष अदालत में जमा करना होगा।
जांच में पूर्ण सहयोग देना होगा और आवश्यकता पड़ने पर ट्रायल कोर्ट व एजेंसियों के सामने उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद आरोपी तत्काल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे, क्योंकि वे ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) में दर्ज अन्य मामलों में अभी भी बंद हैं।

570 करोड़ का कोयला घोटाला, मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन और परमिट सिस्टम के जरिए 570 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध वसूली की गई।
ईडी के अनुसार, खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई द्वारा 15 जुलाई 2020 को परमिट को ऑनलाइन से ऑफलाइन करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद सिंडिकेट बनाकर कोयला व्यापारियों से 25 रुपए प्रति टन की वसूली की गई।
इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड कोयला व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को बताया गया है। व्यापारी उसकी टीम को रकम देने के बाद ही पीट पास और परिवहन पास प्राप्त कर पाते थे।
जांच की जद में बड़े नाम
इस मामले में अब तक 36 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिनमें दो पूर्व मंत्री, विधायक, प्रभावशाली व्यापारी, और अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
जेल में बंद प्रमुख आरोपी:
रानू साहू (सस्पेंडेड IAS)
समीर विश्नोई (IAS)
सौम्या चौरसिया (पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव)
सूर्यकांत तिवारी (कोयला कारोबारी)
साथ ही संदीप नायक, मोइनुद्दीन कुरैशी, रोशन सिंह, निखिल चंद्राकर, और अन्य 10 से अधिक आरोपी जेल में बंद हैं।
ACB और EOW ने जांच तेज की
ईडी की रिपोर्ट के आधार पर ACB/EOW ने इस मामले में कार्रवाई शुरू की थी। अब इन एजेंसियों ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है और सभी आरोपियों की संपत्तियों और लेन-देन की गहराई से जांच की जा रही है।
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