शर्मिष्ठा पनोली को जमानत : कोलकाता हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने के दिए निर्देश; सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर धर्म विशेष पर टिप्पणी का है आरोप
कोलकाता/गुरुग्राम.
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को कोलकाता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को राहत दी। अदालत ने उन्हें ₹10,000 के निजी मुचलके पर जमानत दे दी और आदेश दिया कि उन्हें सोशल मीडिया पर मिल रही धमकियों के मद्देनज़र पुलिस सुरक्षा दी जाए। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि उनके खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध सामने नहीं आया है, ऐसे में हिरासत में लेकर पूछताछ की ज़रूरत नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि शर्मिष्ठा विदेश यात्रा करना चाहें तो इसके लिए उन्हें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) से अनुमति लेनी होगी। कोर्ट ने उनके आवास के बाहर भीड़ इकट्ठा होने के मामलों में पुलिस को शिकायत दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।

गुरुग्राम में बिताए 10 दिन, होटल में छुपकर रही थीं शर्मिष्ठा
शर्मिष्ठा पनोली को कोलकाता पुलिस ने 31 मई को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले वे करीब 10 दिनों तक अपने परिवार के साथ साउथ सिटी-1 स्थित अर्बन ओसिस होटल में ठहरी थीं। होटल मालिक मनोज यादव के अनुसार, उन्होंने 18-19 मई को फोन कर होटल की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर सवाल किए थे। इसके बाद उन्होंने दो कमरे बुक कर 21 मई की सुबह 3 बजे चेक-इन किया था।
होटल स्टाफ को उनकी पहचान की जानकारी नहीं थी। होटल से बाहर निकले बिना उन्होंने पूरा समय वहां बिताया। उनके कमरों का रोज़ाना का किराया ₹6,000 से ₹8,000 के बीच था।
जमानत के बाद इंस्टाग्राम पर लिखा– "मैं पागल हूं"
जमानत पर रिहा होने के बाद शर्मिष्ठा ने अपने इंस्टाग्राम बायो में बदलाव करते हुए लिखा– “इंस्टाग्राम मुझसे नफरत करता है, इसलिए मैंने एक और आईडी बना ली है, क्योंकि मैं ऐसी ही पागल हूं।” उन्होंने अपने नए इंस्टाग्राम अकाउंट का लिंक भी साझा किया और ब्रांड सहयोग से जुड़ी पोस्ट डालने की बात कही।
क्या है पूरा मामला?
शर्मिष्ठा पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के "ऑपरेशन सिंदूर" पर चुप्पी साधने को लेकर बॉलीवुड कलाकार शाहरुख खान, आमिर खान और सलमान खान पर अभद्र टिप्पणी की थी। साथ ही धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ कोलकाता में मामला दर्ज किया गया और उन्हें 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वकील ने बताया गिरफ्तारी को अवैध
शर्मिष्ठा के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि एफआईआर में सभी धाराएं गैर-संज्ञेय थीं और उन्हें बिना नोटिस गिरफ्तार किया गया, जो कानून का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि पनोली ने 7 मई को पोस्ट अपलोड किया और 8 मई को उसे हटा भी लिया। परिवार ने भी पुलिस को खतरे की शिकायत दी थी। वकील ने एफआईआर रद्द करने और ज़मानत की मांग की।
राज्य सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से वकील ने तर्क दिया कि कानूनी नोटिस कई बार देने की कोशिश की गई लेकिन पनोली और उनका परिवार गुरुग्राम भाग गया। कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट मिलने के बाद उन्हें विधिसम्मत ढंग से गिरफ्तार किया गया और उचित जांच की गई।
विवाद के बाद मांगी थी माफी
मामले के तूल पकड़ने के बाद शर्मिष्ठा पनोली ने सोशल मीडिया पर बिना शर्त माफी मांगी। 15 मई को उन्होंने 'एक्स' (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "जो कुछ भी लिखा, वह मेरी व्यक्तिगत भावनाएं थीं। मैंने जानबूझकर किसी की भावना को आहत नहीं किया। कृपया मेरी माफी स्वीकार करें।"
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