स्टारलिंक की भारत में दस्तक : इलॉन मस्क की कंपनी को मिलेगा इंटरनेट सेवा लाइसेंस, ₹840 में देगी अनलिमिटेड डेटा; सिंधिया बोले-प्रक्रिया अंतिम चरण में
नई दिल्ली.
भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए बहुप्रतीक्षित स्टारलिंक (Starlink) को जल्द ही देश में ऑपरेटिंग लाइसेंस मिलने वाला है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) ने पहले ही लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी कर दिया है। अब बस IN-SPACe से अंतिम मंजूरी बाकी है।
मंत्री सिंधिया ने कहा, “फिलहाल दो कंपनियों - वनवेब और रिलायंस जियो - को सैटेलाइट कनेक्टिविटी के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं। स्टारलिंक के लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में है और मुझे विश्वास है कि जल्द ही लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि तीनों लाइसेंसधारी कंपनियों को ऑपरेशन शुरू करने से पहले IN-SPACe की मंजूरी लेनी होगी, जो भारत सरकार की एक स्वतंत्र संस्था है।

भारत में ₹840 में अनलिमिटेड डेटा
The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, Starlink भारत में 10 डॉलर यानी लगभग ₹840 प्रति माह की शुरुआती कीमत पर अनलिमिटेड डेटा वाला इंटरनेट प्लान पेश करेगी। यह सेवा खासकर उन इलाकों में क्रांति ला सकती है जहां अब तक इंटरनेट की पहुंच बेहद सीमित है।
स्टारलिंक का लक्ष्य भारत में अपना यूजर बेस 1 करोड़ तक पहुंचाना है ताकि वह भारी स्पेक्ट्रम लागत की भरपाई कर सके।
स्पेक्ट्रम पॉलिसी और कीमतें
सिंधिया ने कहा कि वनवेब और रिलायंस को फिलहाल सीमित स्पेक्ट्रम एक्सेस दिया गया है और स्टारलिंक को भी ऐसा ही एक्सेस मिलेगा। इसके बाद TRAI स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के लिए नीति बनाएगा। TRAI ने शहरी क्षेत्रों के लिए ₹500 प्रति माह का सुझाव दिया है, जिससे यह सेवा पारंपरिक ब्रॉडबैंड से महंगी साबित हो सकती है।
महंगा होगा सैटेलाइट ब्रॉडबैंड
IIFL और JM फाइनेंशियल की रिपोर्ट्स के अनुसार, सैटेलाइट इंटरनेट की कीमत पारंपरिक होम ब्रॉडबैंड से 7 से 18 गुना अधिक हो सकती है। हालांकि, स्टारलिंक जैसी मजबूत कंपनियां इस चुनौती से निपटने में सक्षम मानी जा रही हैं।
लाइसेंस, शुल्क और रेवेन्यू मॉडल
TRAI की सिफारिशों में शामिल हैं:
AGR (Adjusted Gross Revenue) पर 4% शुल्क
प्रति मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम पर ₹3,500 वार्षिक न्यूनतम शुल्क
कुल मिलाकर 8% लाइसेंस फीस
इन प्रस्तावों को लागू करने से पहले अंतिम सरकारी मंजूरी का इंतजार है।
क्षमता बनी चुनौती
IIFL के मुताबिक, स्टारलिंक की मौजूदा 7,000 सैटेलाइट्स लगभग 4 मिलियन यूजर्स को सेवा दे रही हैं। 18,000 सैटेलाइट्स होने पर भी यह भारत में 2030 तक सिर्फ 15 लाख ग्राहकों को ही कवर कर सकेगी। यानी तेजी से बढ़ती मांग के अनुपात में कैपेसिटी एक बड़ी चुनौती होगी।
IN-SPACe की भूमिका और मंजूरी
स्टारलिंक को अब अंतिम अप्रूवल IN-SPACe से लेना होगा, जो निजी स्पेस कंपनियों के लिए एक सिंगल-विंडो एजेंसी के रूप में काम करती है। इससे पहले यूटेलसैट वनवेब और जियो ने भी यही प्रक्रिया पूरी की थी लेकिन उन्हें दो साल तक इंतजार करना पड़ा था।

Starlink की भारत में कीमतें
प्रारंभिक प्रचार योजना के तहत, Starlink की मासिक शुल्क ₹840 से ₹850 (लगभग $10) के बीच हो सकती है, जिसमें असीमित डेटा की सुविधा शामिल हो सकती है।
हालांकि, प्रचार अवधि के बाद, मासिक शुल्क ₹3,000 से ₹7,000 तक हो सकती है, जो उपयोगकर्ता के स्थान और चुने गए प्लान पर निर्भर करेगा।
हार्डवेयर लागत:
Starlink किट (सैटेलाइट डिश और Wi-Fi राउटर) की कीमत लगभग ₹29,700 हो सकती है।
यदि उपयोगकर्ता व्यक्तिगत ग्राउंड स्टेशन (DTC मॉडल) का विकल्प चुनते हैं, तो इसकी लागत लगभग ₹50,000 तक हो सकती है।


इंटरनेट कैसे पहुंचेगा यूजर्स तक?
स्टारलिंक इंटरनेट सेवा के लिए यूजर को एक किट मिलेगी जिसमें शामिल होंगे:
एक स्टारलिंक डिश (एंटीना)
Wi-Fi राउटर
पावर सप्लाई यूनिट
ट्राइपॉड माउंटिंग सिस्टम
डिश को खुले आसमान के नीचे लगाना होगा ताकि सैटेलाइट से सीधा सिग्नल मिले। इसके लिए एंड्रॉइड और iOS ऐप भी उपलब्ध है।
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