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19th April 2026

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अस्पताल में ‘AI बाबू’ बताएंगे रास्ता : एम्स भोपाल में 10 हजार की भीड़ में अब नहीं भटकेंगे मरीज; गूगल की तरह अंदर भी नेविगेशन

News Affair Team

Sat, Feb 21, 2026

भोपाल.

अस्पताल गए हैं कभी ऐसे, जहां OPD ढूंढते-ढूंढते खुद BP बढ़ जाए?

भोपाल का All India Institute of Medical Sciences Bhopal यानी एम्स भोपाल अब इस झंझट का इलाज टेक्नोलॉजी से करने जा रहा है। दावा है—यह देश का पहला ऐसा बड़ा सरकारी अस्पताल होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मरीजों और उनके परिजनों को रास्ता बताएगा।

रोजाना 10 हजार से ज्यादा लोग इस कैंपस में इलाज, जांच और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। लेकिन दिक्कत एक—बिल्डिंगें एक जैसी, ब्लॉक एक जैसे, गलियारे एक जैसे। नतीजा—मरीज घूमता रहता है, टाइम निकल जाता है।

‘कार्डियोलॉजी किधर है?’ अब मोबाइल बताएगा

एम्स प्रशासन के मुताबिक, अब गूगल मैप की तरह अस्पताल के अंदर भी नेविगेशन मिलेगा।

डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन बताते हैं—
क्यूआर कोड स्कैन करते ही मरीज को पता चल जाएगा कि कार्डियोलॉजी, अमृत फार्मेसी, न्यूरो सर्जरी, पैथोलॉजी, MRI या डॉक्टर का कक्ष किस दिशा में है।

मतलब—हर बार गार्ड से पूछने की जरूरत खत्म।

इतनी बड़ी बिल्डिंग कि AI बुलाना पड़ा

एम्स भोपाल का परिसर काफी विस्तृत है। अंदरूनी डिजाइन ऐसी कि एक ब्लॉक दूसरे जैसा लगता है। पहली बार आने वाले मरीजों को तो छोड़िए, कई बार नियमित आने वाले लोग भी कन्फ्यूज हो जाते हैं।

पैथोलॉजी ढूंढने में 20 मिनट, MRI ढूंढने में आधा घंटा। इस बीच मरीज की हालत और परिजन की चिंता—दोनों बढ़ते हैं।

स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों पर भी हर समय “रास्ता बताने” का अतिरिक्त बोझ रहता है।

इसी समस्या को देखते हुए अब AI आधारित स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली तैयार की जा रही है।

IIT इंदौर और स्टार्टअप की एंट्री

इस प्रोजेक्ट के लिए एम्स भोपाल ने Indian Institute of Technology Indore की दृष्टि टीम के साथ हाथ मिलाया है। भोपाल के एक स्टार्टअप की मदद से AI नेविगेशन सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

यह सिस्टम बिल्कुल गूगल मैप की तरह काम करेगा—बस फर्क इतना कि लोकेशन अस्पताल के अंदर की होगी।

कैसे काम करेगा सिस्टम?

इस टेक्नोलॉजी के दो रूप होंगे:

1. QR कोड आधारित वेब सिस्टम

एम्स के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख जगहों पर QR कोड लगाए जाएंगे।
जैसे ही कोई व्यक्ति कोड स्कैन करेगा, उसके मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा।

वह सर्च करेगा—“Cardiology” या “MRI”
AI तुरंत चरणबद्ध दिशा बताएगा—

  • 50 मीटर सीधे

  • दाईं ओर मुड़ें

  • दूसरी मंजिल पर जाएं

2. मोबाइल ऐप आधारित सिस्टम

यूजर एम्स का ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन का लाभ ले सकेंगे।

भवनों के बीच पहुंचने के लिए GPS तकनीक का इस्तेमाल होगा।

लेकिन ट्विस्ट यहां है—अंदर GPS की सटीकता कम हो जाती है। इसलिए हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे। ये छोटे उपकरण मोबाइल को सटीक दिशा-निर्देशन देंगे, ताकि व्यक्ति बिना भटके सही जगह पहुंच सके।

एक महीने का ट्रायल, फिर फाइनल फैसला

इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक महीने के पायलट के रूप में लागू किया जाएगा।

इस दौरान देखा जाएगा:

  • लोग इसे कितना इस्तेमाल कर रहे हैं

  • क्या वाकई समय बच रहा है

  • स्टाफ पर बोझ कम हो रहा है या नहीं

अगर परिणाम संतोषजनक रहे, तो इसे पूरे परिसर में लागू कर दिया जाएगा।

इससे फायदा किसे?

  • मरीज का समय बचेगा

  • परिजनों का तनाव कम होगा

  • भीड़ का दबाव घटेगा

  • स्टाफ का समय बचेगा

सबसे बड़ी बात—अस्पताल में अफरा-तफरी कम होगी।

AI अस्पतालों में नया ट्रेंड?

अब तक AI का इस्तेमाल डायग्नोसिस, रिपोर्ट एनालिसिस और रोबोटिक सर्जरी में देखा गया है। लेकिन अस्पताल के अंदर नेविगेशन के लिए AI का यह प्रयोग सरकारी स्तर पर नई पहल माना जा रहा है।

अगर यह मॉडल सफल होता है, तो देश के दूसरे बड़े सरकारी अस्पताल भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

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