भोपाल की वोटर लिस्ट में ‘सफाई अभियान’? : 3.80 लाख नाम बाहर, गोविंदपुरा और नरेला में सबसे ज्यादा कटौती
News Affair Team
Sat, Feb 21, 2026
भोपाल.
भोपाल की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा किसी बयान की नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट की है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद तस्वीर साफ हो गई है—राजधानी की मतदाता सूची से 3 लाख 80 हजार 455 नाम हटाए गए हैं।
यानि जितनी आबादी कई छोटे शहरों की होती है, उतने वोटर अब लिस्ट में नहीं दिखेंगे।

पहले कितने थे, अब कितने बचे?
27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में Bhopal में कुल मतदाता थे 21,25,908।
अब यह संख्या घटकर 17,45,453 रह गई है। सीधा हिसाब लगाइए—3.80 लाख से ज्यादा नाम कम।
सवाल उठ रहा है—क्या यह सिर्फ तकनीकी सुधार है या राजनीतिक गणित भी बदलेगा?
प्रक्रिया क्या रही?
23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची जारी हुई। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अपने-अपने बूथ पर बैठे।
इस दौरान फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ने के लिए), फॉर्म 7 (नाम हटाने के लिए) और फॉर्म 8 (संशोधन के लिए) स्वीकार किए गए।
जिन मतदाताओं को ‘नो मैपिंग’ में रखा गया, उन्हें नोटिस जारी हुए। करीब 50 दिन तक रिकॉर्ड खंगाला गया।
14 फरवरी तक यह प्रक्रिया पूरी हुई। अब शनिवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के बाद फाइनल मतदाता सूची जारी होगी।
किस विधानसभा में कितनी कटौती?
भोपाल की 7 विधानसभा सीटों में तस्वीर अलग-अलग है।
1. बैरसिया
सबसे कम कटौती यहीं हुई—8,889 नाम हटे। यहां बीजेपी के विधायक विष्णु खत्री हैं।
2. भोपाल उत्तर
44,094 मतदाता कम हुए। यह सीट कांग्रेस के आतिफ अकील के पास है।
3. नरेला
70,917 नाम हटे। यह विधानसभा मंत्री Vishvas Sarang की है।
4. भोपाल दक्षिण-पश्चिम
61,515 मतदाताओं के नाम कटे। यहां बीजेपी के भगवानदास सबनानी विधायक हैं।
5. भोपाल मध्य
62,960 नाम हटाए गए। यह सीट कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के पास है।
6. गोविंदपुरा
सबसे ज्यादा कटौती यहीं—81,143 मतदाता कम। यह विधानसभा मंत्री Krishna Gaur की है।
7. हुजूर
50,838 नाम हटे। यहां बीजेपी के रामेश्वर शर्मा विधायक हैं। गोविंदपुरा और नरेला में सबसे ज्यादा कटौती ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
उम्र का भी होगा खुलासा
फाइनल सूची में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी।
जानकारी के मुताबिक, ऐसी उम्र श्रेणी में करीब 125 मतदाता हैं। मतलब, शतायु वोटर्स भी इस बार चर्चा में रहेंगे।
थर्ड जेंडर वोटर भी कम हुए
SIR के बाद थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या में भी गिरावट दर्ज हुई है। पहले कुल 166 थर्ड जेंडर वोटर थे। अब यह संख्या घटकर 72 रह गई है।
सबसे ज्यादा बदलाव भोपाल मध्य में दिखा—जहां पहले 104 थे, अब 35 रह गए हैं। यह आंकड़ा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, सामाजिक चर्चा का विषय भी बन सकता है।
क्या बदलेगा राजनीतिक समीकरण?
3.80 लाख नाम कम होना कोई छोटी बात नहीं। यह संख्या कई विधानसभा क्षेत्रों के जीत-हार के अंतर से ज्यादा है।
अगर ये नाम डुप्लीकेट, शिफ्टेड या मृत मतदाताओं के थे, तो इसे सूची शुद्धिकरण माना जाएगा।
लेकिन अगर सक्रिय मतदाता भी सूची से बाहर हुए, तो आने वाले चुनाव में यह मुद्दा बन सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन सीटों पर 60-80 हजार नाम हटे हैं, वहां पार्टियां अपने-अपने बूथ स्तर के नेटवर्क को फिर से सक्रिय करेंगी।
प्रशासन क्या कह रहा?
प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है। ‘नो मैपिंग’ श्रेणी के मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, दस्तावेज जांचे गए और निर्धारित समय में सुनवाई की गई।
अब फाइनल सूची सार्वजनिक होगी, जिसके बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
आगे क्या?
फाइनल मतदाता सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर समीक्षा करेंगे। बूथ स्तर पर दोबारा संपर्क अभियान चल सकते हैं।
और सबसे अहम—आम मतदाता को अपनी स्थिति जांचनी होगी। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ा हथियार वोट है। और अगर नाम ही सूची में नहीं, तो हथियार बेकार।
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