बांग्लादेश की करेंसी में अब 'राष्ट्रपिता' नहीं : शेख मुजीब की तस्वीर हटाई गईमंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों को दी गई जगह; 1000, 50 और 20 टका के नए नोट जारी
News Affair Team
Tue, Jun 3, 2025
इंटरनेशनल डेस्क.
बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने रविवार को 1000, 50 और 20 टका के नई डिजाइन वाले नोट जारी किए हैं, जिन पर अब तक छपी शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को हटा दिया गया है।
केंद्र ने साफ किया है कि अब नोटों पर किसी भी व्यक्ति की तस्वीर नहीं होगी, बल्कि उनमें देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को प्रदर्शित किया जाएगा।
नए नोटों में बांग्लादेश की धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता दी गई है:
20 टका: कंटाजी हिंदू मंदिर (दिनाजपुर), पहाड़पुर बौद्ध मठ
50 टका: अहसान मंजिल (ढाका), चित्रकार जैनुल आबेदीन की पेंटिंग
1000 टका: राष्ट्रीय शहीद स्मारक, जातीय संसद भवन
सभी नोटों पर रॉयल बंगाल टाइगर का वॉटरमार्क और केंद्रीय बैंक का मोनोग्राम भी शामिल है।



केंद्रीय बैंक की सफाई
बांग्लादेश बैंक के प्रवक्ता आरिफ हुसैन खान ने बताया कि- "नए नोटों की डिजाइन में किसी व्यक्ति की छवि नहीं होगी। ये नोट देश के ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि पुराने नोट भी वैध बने रहेंगे, और नए नोट पहले बैंक मुख्यालय से तथा फिर पूरे देश के बैंकों में वितरित किए जाएंगे।
करेंसी बदलाव: इतिहास में 5वीं बार
1971 में स्वतंत्रता के बाद यह पांचवां मौका है जब बांग्लादेश के नोटों का डिज़ाइन बदला गया है:
1972 – भौगोलिक व सांस्कृतिक चित्र
1970s–90s – राजनीतिक छवियां
2000s – डिजिटल और सुरक्षा फीचर
2020s – शेख मुजीब प्रमुख चेहरा
2025 – व्यक्ति-मुक्त, सांस्कृतिक स्थलों पर फोकस
क्या बदल रही बांग्लादेश की राजनीतिक धारा
विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नए नोटों से शेख मुजीब की तस्वीर हटाना एक राजनीतिक बदलाव का संकेत है। शेख मुजीब की तस्वीरें अतीत में तब प्रमुखता से नोटों में आई थीं जब उनकी बेटी शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग सत्ता में थी। अब सत्ता में आई अंतरिम सरकार ने शेख मुजीब से जुड़ी कई राष्ट्रीय प्रतीकों और छुट्टियों को भी खत्म कर दिया है, जिसे सत्ता परिवर्तन और नई राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

शेख हसीना पर मुकदमा और तख्पतालट
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर अब मानवता के खिलाफ अपराधों में मुकदमा शुरू हो गया है। इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) में दर्ज आरोपों के अनुसार, जुलाई 2024 के आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान 1500 से अधिक लोगों की मौत और 25,000 से अधिक घायल हुए थे। हसीना पर 5 अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं और अब उन पर औपचारिक ट्रायल शुरू हो चुका है।

छात्रों के आंदोलन ने बदली देश की राजनीति
आरक्षण नीति को लेकर ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने तख्तापलट का रूप ले लिया था। जब अदालत ने स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को 30% आरक्षण देने की बात कही, तो हसीना सरकार ने पहले उसे लागू किया और बाद में वापस भी लिया। लेकिन तब तक छात्र सड़कों पर उतर चुके थे। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने देश छोड़ दिया और अंतरिम सरकार की स्थापना हुई।
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