शेख हसीना के खिलाफ ट्रायल शुरू : बांग्लादेश की ट्रिब्यूनल में दर्ज हुए पांच गंभीर आरोप; आतंकी संगठन JUD का दावा- उन्होंने कराया तख्तापलट
News Affair Team
Mon, Jun 2, 2025
ढाका/नई दिल्ली.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराधों के गंभीर आरोपों में आधिकारिक रूप से ट्रायल शुरू हो गया है। बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने रविवार को इन आरोपों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया।
चीफ प्रॉसिक्यूटर ताजुल इस्लाम और उनके सहयोगी गाजी मनोवार हुसैन तमीम ने बताया कि 12 मई 2025 को जमा की गई जांच रिपोर्ट में शेख हसीना के खिलाफ पांच आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप जुलाई 2024 में हुए राजनीतिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और नरसंहार से जुड़े हैं।
रिपोर्ट के अनुसार:
1500 से अधिक लोगों की मौत हुई
25,000 से ज्यादा लोग घायल हुए
हाफिज सईद के संगठन ने किया तख्तापलट का दावा
इस पूरे घटनाक्रम में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मुंबई 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा (JUD) के आतंकियों ने दावा किया कि उन्होंने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ तख्तापलट की साजिश में भूमिका निभाई। JUD आतंकी सैफुल्लाह कसूरी और मुजम्मिल हाशमी ने लाहौर में दिए गए भाषणों में कहा कि:
"10 मई को हमने 1971 का बदला ले लिया है। हमने खलीज (बंगाल की खाड़ी) में दो-राष्ट्र सिद्धांत को डुबोने वालों को सबक सिखा दिया है।"
यह बयान इशारा करते हैं कि आतंकी नेटवर्क का बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप रहा है।

शेख हसीना का पासपोर्ट रद्द, गिरफ्तारी वारंट जारी
तख्तापलट के बाद बनी यूनुस सरकार ने शेख हसीना पर हत्या, अपहरण, देशद्रोह सहित 225 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। सरकार ने हसीना का पासपोर्ट रद्द कर दिया है और ICT ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। हसीना को 12 फरवरी 2025 तक ट्रिब्यूनल में पेश होने का आदेश दिया गया था।
भारत में शरण, प्रत्यर्पण की मांग खारिज
शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं और बांग्लादेश सरकार ने भारत से उन्हें डिपोर्ट करने की अपील की थी। हालांकि, भारत सरकार ने उनका वीजा बढ़ा दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत उन्हें वापस नहीं भेजेगा।

इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस की मांग
बांग्लादेश पुलिस ने अप्रैल 2025 में इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की मांग की थी। इसे शेख हसीना सहित 11 अन्य नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ मांगा गया है। इन पर नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और संवैधानिक उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप हैं।
हसीना समर्थकों का कहना है कि यह ट्रायल राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
वहीं यूनुस सरकार इसे "न्यायिक प्रक्रिया और लोकतंत्र की बहाली" बता रही है।
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