‘कुत्ते बनाम मुसलमान’ पोस्ट से बवाल : अमेरिकी सांसद फिर भी नहीं झुके; फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट ने लिखा था- न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा
वाशिंगटन डीसी.
अमेरिकी राजनीति में बयानबाज़ी नई बात नहीं. लेकिन इस बार मामला कुछ ऐसा है कि वॉशिंगटन से लेकर न्यूयॉर्क तक सियासी थर्मामीटर चढ़ गया है. एक सोशल मीडिया पोस्ट, एक तीखी प्रतिक्रिया और फिर आरोपों का सिलसिला—पूरा घटनाक्रम ऐसा जैसे आग में घी डालने का काम किसी ने जानबूझकर किया हो.
मामला अमेरिकी सांसद Randy Fine से जुड़ा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ऐसा बयान दे दिया, जिसने देश में इस्लामोफोबिया, अभिव्यक्ति की आज़ादी और सांस्कृतिक पहचान की बहस को फिर से जगा दिया.
शुरुआत कैसे हुई?
न्यूयॉर्क की फिलिस्तीनी-अमेरिकी एक्टिविस्ट Nerdeen Kiswani ने एक पोस्ट में लिखा कि “कुत्ते अपवित्र होते हैं. जब न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है, तो घरों के अंदर कुत्ते नहीं होने चाहिए. इन्हें बैन कर देना चाहिए.”
यह पोस्ट न्यूयॉर्क में सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों की गंदगी को लेकर चल रही बहस से जुड़ा बताया गया. बाद में किसवानी ने सफाई दी कि यह व्यंग्य था, और उन लोगों पर कटाक्ष था जो मुस्लिम समुदाय के बढ़ते प्रभाव को खतरे की तरह पेश करते हैं.
लेकिन तब तक बात हाथ से निकल चुकी थी.

फाइन का जवाब और विवाद
रैंडी फाइन ने इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा—“अगर कुत्तों और मुसलमानों में से एक को चुनना पड़े, तो यह मुश्किल फैसला नहीं है.”
इसके साथ उन्होंने यह भी जोड़ा कि दुनिया में 57 मुस्लिम देश हैं जहां शरिया कानून लागू है, “अगर आपको वही चाहिए तो वहीं जाइए. अमेरिका 58वां मुस्लिम देश नहीं बनेगा.”
बस, यहीं से तूफान खड़ा हो गया.
सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल हुई. 4 करोड़ से ज्यादा व्यूज, हजारों कमेंट्स और तीखी प्रतिक्रियाएं. आलोचकों ने इसे सीधे-सीधे मुसलमानों का अमानवीयकरण बताया.
आरोप: “मुसलमानों को जानवरों से भी नीचे दिखाया”
किसवानी ने फाइन पर पलटवार करते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि खुलेआम मुस्लिम विरोधी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने अमेरिकी-इस्लामिक रिलेशंस काउंसिल, यानी Council on American-Islamic Relations (CAIR) का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की.
CAIR ने बयान जारी कर फाइन के इस्तीफे की मांग दोहराई.
कैलिफोर्निया के गवर्नर Gavin Newsom ने उन्हें “नस्लवादी” बताते हुए पद छोड़ने को कहा. ब्रिटिश पत्रकार Piers Morgan ने भी कड़ी आलोचना की.
वॉशिंगटन में डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे इस्लामोफोबिया करार दिया और हाउस स्पीकर से निंदा की मांग की.

फाइन का पलटवार: “कुत्ते हमारे परिवार हैं”
विवाद बढ़ा तो फाइन पीछे नहीं हटे. उन्होंने न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका पोस्ट किसवानी के बयान के जवाब में था, जो “शरिया कानून थोपने की मानसिकता” को दर्शाता है.
उन्होंने कहा—“अमेरिका में कुत्ते परिवार के सदस्य हैं. हम यूरोप की तरह शर्मिंदा होकर अपनी संस्कृति नहीं छोड़ेंगे.”
उन्होंने ‘Don’t Tread on Me’ स्लोगन वाली कुत्तों की तस्वीरें शेयर कीं, जो अमेरिकी राष्ट्रवाद का प्रतीक माना जाता है.
पुराना रिकॉर्ड भी चर्चा में
यह पहली बार नहीं है जब फाइन विवादों में आए हों. 2025 में गाजा को लेकर दिए गए उनके बयानों पर भी भारी आलोचना हुई थी. उन्होंने कहा था कि जब तक इजराइली बंधक रिहा न हों, गाजा पर सख्ती जारी रहनी चाहिए.
फाइन इजराइल के मुखर समर्थक माने जाते हैं और अक्सर फिलिस्तीन-इजरायल मुद्दे पर कड़े बयान देते हैं.
न्यूयॉर्क की राजनीति से जुड़ाव
इस पूरे विवाद को न्यूयॉर्क की मौजूदा राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. शहर के मेयर Zoharan Mamdani अमेरिका के बड़े शहरों में चुने जाने वाले पहले मुस्लिम मेयरों में गिने जाते हैं.
हालांकि किसवानी ने अपने पोस्ट में उनका नाम नहीं लिया, लेकिन “न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है” वाले बयान को कई लोगों ने ममदानी के कार्यकाल से जोड़ दिया.
ममदानी 2025 के चुनाव में जीते और 1 जनवरी 2026 से उनका कार्यकाल शुरू हुआ. वे प्रगतिशील नीतियों—जैसे किराए पर रोक, मुफ्त बस सेवा और किफायती आवास—पर जोर दे रहे हैं.
उनकी पृष्ठभूमि भी चर्चा में रहती है. उनका जन्म कंपाला, युगांडा में हुआ. वे मशहूर फिल्म निर्देशक Mira Nair के बेटे हैं और सात साल की उम्र में न्यूयॉर्क आए थे.
बड़ा सवाल: अभिव्यक्ति या घृणा?
अब असली बहस यही है—क्या यह अभिव्यक्ति की आज़ादी है या नफरत फैलाने वाली भाषा?
रिपब्लिकन समर्थकों का कहना है कि फाइन ने एक व्यंग्यात्मक पोस्ट का जवाब दिया और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की बात की. वहीं डेमोक्रेट्स और सिविल राइट्स समूहों का कहना है कि किसी धार्मिक समुदाय की तुलना जानवरों से करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
अमेरिका पहले भी नस्लीय और धार्मिक टिप्पणियों को लेकर विभाजित रहा है. लेकिन इस बार मामला सीधे निर्वाचित प्रतिनिधि के बयान से जुड़ा है.
आगे क्या?
फाइन के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई होगी या नहीं, यह साफ नहीं है. लेकिन सोशल मीडिया का यह विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है.
एक तरफ धार्मिक पहचान, दूसरी तरफ सांस्कृतिक परंपरा. एक तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, दूसरी तरफ संवेदनशीलता की मांग.
फिलहाल इतना तय है—एक पोस्ट ने अमेरिका की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. और यह बहस इतनी जल्दी खत्म होती नहीं दिख रही.
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