रायपुर बना तस्करों का सेफ जोन : छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास में वन्यजीव तस्करी; तांत्रिक समेत 3 आरोपी हिरण की खाल-के साथ गिरफ्तार
News Affair Team
Thu, May 29, 2025
रायपुर.
छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास और तंत्र क्रिया के चलते वन्यजीवों के शिकार और उनके अवशेषों की तस्करी लगातार बढ़ रही है। रायपुर को तस्करों ने वन्यजीव अवशेषों के सौदे का सेफ जोन बना दिया है। हाल ही में वन विभाग की रेंज स्तरीय फ्लाइंग टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हिरण की खाल और पांच सींग के साथ एक तांत्रिक सहित तीन तस्करों को पकड़ा है।
27 मई दोपहर 3 बजे, वन विभाग की फ्लाइंग टीम को इनपुट मिला कि एक बोलेरो वाहन में वन्यजीवों के अवशेष लेकर तीन व्यक्ति रायपुर की ओर रवाना हुए हैं। सूचना मिलते ही टीम प्रभारी दीपक तिवारी ने विधानसभा-बलौदाबाजार रोड पर घेराबंदी की। कुछ देर बाद एक निजी स्कूल के पास तीनों को धर दबोचा गया।

पकड़े गए आरोपियों में शामिल हैं:
आनंद श्रीवास्तव (तांत्रिक), निवासी पेंशनबाड़ा, रायपुर
तुलाराम पटेल, निवासी पीपरछेड़ी, कसडोल
भागीरथ पैकरा, निवासी कसडोल
पूछताछ में पता चला कि इन लोगों ने हिरण की खाल और सींगों की डील ₹2.5 लाख में तय की थी। सौदा पूरा होने से पहले आनंद श्रीवास्तव ने इन अवशेषों का इस्तेमाल लक्ष्मी पूजा में करने की बात भी कबूली।
खाल 6 महीने पुरानी, पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं आरोपी
रेंजर दीपक तिवारी ने बताया कि हिरण की खाल करीब 6 महीने पुरानी है और यह भागीरथ पैकरा के पास थी। तीनों आरोपी एक-दूसरे के पुराने जानकार हैं। तांत्रिक आनंद श्रीवास्तव पूर्व में भी हथियारों के साथ जंगल में गिरफ्तार हो चुका है, जबकि भागीरथ को बारनवापारा के जंगल में फंदा लगाते पकड़ा गया था।
एक महीने में दूसरी बड़ी कार्रवाई
यह कार्रवाई रेंज टीम की एक महीने में दूसरी बड़ी सफलता है। इससे पहले 29 अप्रैल को रायपुर से दो तस्कर फराज और नियाद हिरण-चीतल के सींगों के साथ पकड़े गए थे।
बारनवापारा और पिरदा के जंगल शिकारियों के निशाने पर
वन विभाग के अनुसार बारनवापारा और पिरदा के जंगल शिकारियों के लिए सेफ प्लेस बनते जा रहे हैं। 26 मई को भी बलौदाबाजार वन टीम ने दो शिकारियों को बारनवापारा में गिरफ्तार किया था। आरोपी थे:
बंटी कुमार मैथ्यूज, निवासी कसडोल
सुरेंद्र फरमान दास, निवासी कोरबा
इनसे एयर गन, टॉर्च, मोबाइल और अन्य शिकार सामग्री जब्त की गई थी।
4 साल में 220 हिरणों का शिकार
आंकड़ों के अनुसार, पिछले 4 वर्षों में छत्तीसगढ़ में 220 हिरणों का शिकार किया जा चुका है। तंत्र-मंत्र के नाम पर इनकी खाल और सींगों की तस्करी का धंधा लगातार फल-फूल रहा है।
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