रायपुर में 2 करोड़ का विदेशी सोना जब्त : दुरंतो एक्सप्रेस में 1.242 किलो गोल्ड मिला; दो आरोपी गिरफ्तार
News Affair Team
Sun, Aug 16, 2026
रायपुर.
स्वतंत्रता दिवस के चलते देशभर के एयरपोर्ट और प्रमुख परिवहन मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। इसी बीच रायपुर में रेलवे के रास्ते विदेशी सोने की तस्करी का मामला सामने आया है। रायपुर-नागपुर रेलवे सुरक्षा बल क्राइम ब्रांच और DRI की संयुक्त टीम ने हावड़ा-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस से 1.242 किलो सोना जब्त किया। बरामद सोने की कीमत करीब 2 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
कार्रवाई के दौरान ट्रेन के बी-12 कोच में तलाशी ली गई। टीम को 7 सोने के बिस्किट और एक सोने की छड़ मिली। मामले में महाराष्ट्र के रहने वाले सुरेश कुमार और धैर्यशील को गिरफ्तार किया गया है।

7 सोने के बिस्किट और एक छड़ बरामद
तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से कुल 1.242 किलो सोना मिला। जांच एजेंसियों ने इसे विदेशी सोना बताया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सोना कहां से लाया गया था और इसे किसे पहुंचाया जाना था।
छत्तीसगढ़ में पहले भी पकड़ा गया तस्करी का सोना
छत्तीसगढ़ में विदेशी सोने की तस्करी का यह पहला मामला नहीं है। उपलब्ध DRI आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में रायपुर में DRI का जोनल कार्यालय शुरू होने के बाद से अब तक करीब 37 किलो सोना और 5 हजार किलो से ज्यादा चांदी जब्त की जा चुकी है।
जांच के दौरान तस्करी के लिए बेल्ट-बैग, टिफिन और अन्य सामान में सोना छिपाने के मामले भी सामने आए हैं। कारोबारियों की भूमिका की जांच में ED भी कई मामलों में कार्रवाई कर चुकी है।
6 साल में 25 से ज्यादा तस्कर गिरफ्तार
DRI के आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में छत्तीसगढ़ में सोना तस्करी के मामलों में 25 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एजेंसियों के मुताबिक, अलग-अलग मामलों में जब्त सोने की कीमत करोड़ों रुपए में रही है।
बांग्लादेश-म्यांमार से कोलकाता, फिर दूसरे राज्यों तक नेटवर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक तस्करी का सोना बांग्लादेश और म्यांमार से कोलकाता पहुंचने के बाद सड़क और रेल मार्ग से छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्यों में भेजा जाता है।
रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव को इस नेटवर्क के प्रमुख ठिकानों के तौर पर देखा गया है। यहां से सोना मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक पहुंचाए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।
सरगना से लेकर स्थानीय खरीदार तक पूरा नेटवर्क
जांच में तस्करी के नेटवर्क के कई स्तर सामने आए हैं। इसमें सरगना, सप्लायर, पैडलर और स्थानीय खरीदार शामिल होते हैं। पैडलर का काम एक जगह से दूसरी जगह सोना पहुंचाना होता है। गिरोह के सदस्य कई बार सोने को छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग लोगों के जरिए भेजते हैं, ताकि एक व्यक्ति के पकड़े जाने पर पूरा माल और नेटवर्क उजागर न हो।
बेल्ट, बैग और टिफिन में छिपाकर ले जाते हैं सोना
एजेंसियों की कार्रवाई में तस्करों के अलग-अलग तरीके सामने आए हैं। सोना कभी बेल्ट में तो कभी बैग, तकिए, टिफिन, कमरबंद और कपड़ों में छिपाकर ले जाने के मामले मिले हैं। रेल और सड़क मार्ग तस्करी के प्रमुख माध्यम बताए जाते हैं।
तस्करी से सरकार को राजस्व का नुकसान
बिना वैध दस्तावेज और बिल के सोने की खरीद-बिक्री से सरकार को सीमा शुल्क और अन्य करों के रूप में राजस्व का नुकसान होता है। इसके अलावा सस्ता तस्करी वाला सोना बाजार में आने से वैध कारोबार पर भी असर पड़ता है।
सूचना देने वाले को 20% तक इनाम
DRI ने तस्करी से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए अपना सूचना तंत्र भी मजबूत किया है। विभाग के प्रावधान के मुताबिक, सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को जब्त माल की कीमत का 20% तक इनाम दिया जा सकता है। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान भी है।
ED की जांच में भी सामने आया बड़ा नेटवर्क
सोना तस्करी से जुड़े मामलों में DRI के अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने भी छत्तीसगढ़ के कुछ कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ED की जांच में दुबई से करीब 260 करोड़ रुपए के सोने की तस्करी और उसे छत्तीसगढ़ में खपाने से जुड़ा इनपुट सामने आया था। इस मामले में जांच एजेंसी ने अब तक 64.14 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त/अटैच किए जाने की जानकारी दी है। मामले की जांच जारी है।
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