इंडिगो करेगी पायलटों की भर्ती : 5,000 फ्लाइट कैंसिल के बाद ‘ऑपरेशन 1000 पायलट’ क्यों शुरू?
News Affair Team
Sun, Feb 15, 2026
नई दिल्ली.
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo अब बड़े पैमाने पर पायलटों की भर्ती करने जा रही है। खबर है कि कंपनी 1,000 से ज्यादा पायलट नियुक्त करेगी। एविएशन सेक्टर में इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी भर्ती मुहिमों में गिना जा रहा है।
लेकिन सवाल ये है - अचानक इतनी बड़ी भर्ती की जरूरत क्यों पड़ी?

दिसंबर वाला संकट याद है?
पिछले साल दिसंबर में इंडिगो को बड़ा झटका लगा था। सिर्फ 7 दिनों में 5,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। वजह - क्रू की कमी।
यात्रियों की नाराजगी, सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ और ऑपरेशनल दबाव।
तब मामला सीधे रेगुलेटर DGCA तक पहुंचा था। जांच में सामने आया कि नए नियमों के मुताबिक पर्याप्त पायलट उपलब्ध नहीं थे।
क्या थे नए नियम?
दिसंबर से पायलटों के आराम (Rest) को लेकर सख्त नियम लागू हुए।
रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लैंडिंग की संख्या सीमित
साप्ताहिक आराम का समय बढ़ाया गया
लगातार ड्यूटी घंटों पर नियंत्रण
नियम तो सुरक्षा के लिए थे, लेकिन इंडिगो की प्लानिंग उतनी तेज नहीं थी। नतीजा - शेड्यूल बिगड़ा, फ्लाइट कैंसिल हुईं।
अब क्या प्लान है?
किन पदों पर भर्ती?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भर्ती में शामिल होंगे:
ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर
सीनियर फर्स्ट ऑफिसर
कैप्टन
यानी एंट्री लेवल से लेकर अनुभवी पायलट तक।
हर महीने 4 नए विमान
इंडिगो हर महीने अपने बेड़े में 4 नए विमान जोड़ रही है। ज्यादा विमान मतलब ज्यादा उड़ानें, और ज्यादा उड़ानें मतलब ज्यादा पायलट।
फिलहाल कंपनी हर महीने 20–25 फर्स्ट ऑफिसर को प्रमोट कर कैप्टन बना रही है। लेकिन एक ट्रेनी को तैयार होने में 6 महीने लगते हैं। और कैप्टन बनने के लिए 1,500 घंटे की उड़ान जरूरी है। यानी भर्ती करना आसान, तैयार करना मुश्किल।
DGCA के नियम क्यों चुनौती हैं?
नियम के मुताबिक हर विमान के लिए तीन सेट पायलट जरूरी - एक कैप्टन + एक फर्स्ट ऑफिसर। लेकिन इंडिगो के विमान ज्यादा घंटे उड़ते हैं। इसलिए उसे मानक से लगभग दोगुने पायलटों की जरूरत पड़ती है।
जांच में पाया गया था कि कंपनी को 2,422 कैप्टन चाहिए थे, लेकिन उपलब्ध थे 2,357। छोटी सी कमी, लेकिन असर बड़ा। स्थिति संभालने के लिए DGCA ने 10 फरवरी तक नाइट ड्यूटी नियमों में अस्थायी छूट भी दी थी।
समझिए मामला
दिसंबर में संकट आया। यात्री फंसे। रेगुलेटर सख्त हुआ। अब कंपनी कह रही है - “1000 पायलट लाओ।” यह सिर्फ भर्ती नहीं, भरोसा बहाल करने की कोशिश है।
क्योंकि एविएशन सेक्टर में एक चीज सबसे अहम है - भरोसा। और भरोसा तभी आता है जब उड़ान समय पर हो।
आगे क्या?
अगर भर्ती समय पर पूरी होती है और ट्रेनिंग तेज की जाती है, तो इंडिगो अपने विस्तार प्लान को मजबूती दे सकती है। लेकिन अगर पायलटों की कमी फिर हुई, तो दोबारा वही संकट लौट सकता है।
फिलहाल संदेश साफ है - इंडिगो उड़ान बढ़ा रही है, लेकिन इस बार पायलट पहले।
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