फूड सेफ्टी इंडेक्स / गोवा पहले नंबर पर, फिर पिछड़ा राजस्थान और छत्तीसगढ़

देश राजस्थान
फूड सेफ्टी इंडेक्स में फूड टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर व सर्विलेन्स, मेनपावर, प्रशिक्षण, जागरुकता और कंज्यूमर एंपावरमेंट के मामले में राजस्थान को 100 में से 54.5, जबकि छत्तीसगढ़ को महज 48.4  अंक मिले है।
  • पिछले साल के मुकाबले उपभोक्ताओं की संतुष्टि-शिकायत पर कार्यवाही करने पर 11 अंक बढ़े
  • देश में गुजरात दूसरे, तमिलनाडु तीसरे, महाराष्ट्र चौथो और छत्तीसगढ़ को महज 48.4 अंक

जयपुर/रायपुर. फूड सेफ्टी इंडेक्स में फूड टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर व सर्विलेन्स, मेनपावर, प्रशिक्षण, जागरुकता और कंज्यूमर एंपावरमेंट के मामले में राजस्थान को 100 में से 54.5, जबकि छत्तीसगढ़ को महज 48.4  अंक मिले है। राजस्थान जहां बड़े राज्यों के हिसाब से 11 वें नंबर पर है, वहीं छत्तीसगढ़ छोटे राज्यों में 5वें नंबर पर है।

बड़े राज्यों में पहले नंबर पर गुजरात, दूसरे पर तमिलनाडु और तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र रहा है। सुखद बात ये है कि कोविड-19 के बावजूद राजस्थान पिछले साल की तुलना में कुछ खामियों में सुधार करने पर 11 अंकों की वृद्धि हुई है। यानि 43 से बढ़कर इस बार 54.5 अंक मिले है।

वहीं छोटे राज्यों में 83.5 अंकों के साथ गोवा टॉप पर है। पांंच पैरामीटर के आधार पर इसे तय किया गया है। यह खुलासा केन्द्र के एफएसएसआई नई दिल्ली की ओर सेे ‘फूड सेफ्टी इंडेक्स’ की रिपोर्ट में हुआ है।

एफएसएसएआई ने 100 में से 60 से कम अंक वाले राज्यों को फूड सेफ्टी के मामले में कमजोर स्थिति में शामिल किया है। हालांकि चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में होली, दिवाली ही नहीं शिकायत मिलने व समय-समय पर खाद्य पदार्थों में मिलावट के नमूने लिए है।

ये रहीं खामियां : प्रदेश की जनसंख्या के हिसाब से लाइसेन्स व रजिस्ट्रेशन नहीं, फुल टाइम अभिहित अधिकारी की नियुक्ति नहीं, फूड सेफ्टी कमिश्नर के पद पर आईएएस की नियुक्ति नहींं। फुल टाइम फूड सेफ्टी कमिश्नर नियुक्त नहीं। प्रदेश की एक भी फूड लैब एनएबीएल से मान्य नहीं। प्रदेश में 98 में से सिर्फ 58 एफएसओ काम कर रहे है।

किस राज्य को कितना स्कोर

  • गुजरात : 78.2
  • तमिलनाडु: 74.9
  • महाराष्ट्र : 72.7
  • केरल: 71.6
  • पंजाब : 65.3
  • कर्नाटक : 62.3
  • उत्तर प्रदेश : 60.2
  • पश्चिम बंगाल: 59.3
  • तेलंगाना: 56.8
  • मध्य प्रदेश : 54.8

पहले (वर्ष 2019)100 में से मिले 43 अंक
मानव संसाधन : 20 में से 7
काम्पलीएंस : 30 में से 13
फूड टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विलेन्स: 20 में 12
ट्रेनिंग एंड केपेसिटी बिल्डिंग: 10 में से 3
कंज्यूमर एंपावरमेंट: 20 में 8

अब (वर्ष 2020) 100 में से 54.5 अंक
मानव संसाधन : 20 में से 9
काम्पलीएंस : 30 में से 23
फूड टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विलेंस : 20 में से 12
ट्रेनिंग एंड केपेसिटी बिल्डिंग: 10 में से 4.5
कंज्यूमर एंपावरमेंट : 20 में 6

प्रोजेक्ट का इंतजार : प्रदेश में ईट राइट कैपस, बीएचओजी, रेस्टोरेंट की हाइजीन के आधार पर रैकिंग, क्लीन स्ट्रीट फूड हब जैसे प्रोजेक्ट का इंतजार है।

पिछले साल की तुलना में इस बार 11 अंक अधिक मिले है। खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जा रहे है। मिलावट रोकने के लिए महाराष्ट्र व गुजरात की तर्ज पर फूड सेफ्टी कमिश्नरेट बनाया जाना प्रस्तावित है।
-डॉ.के.के.शर्मा, फूड सेफ्टी कमिश्नर, राजस्थान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *