खतरे में चीन?/ राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना से कहा-ट्रेनिंग और जंग की तैयारी तेज कर दें, सबसे मुश्किल हालत के लिए रहें तैयार

विदेश
China President Xi Jinping
  • पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के डेलिगेशन की प्लेनरी मीटिंग में बोले चीनी राष्ट्रपति
  • खतरे का कोई जिक्र नहीं किया, हालांकि तिब्बत सीमा पर भारत और चीन के बीच कुछ समय से बना हुआ है तनाव

बीजिंग. कोरोनावायरस के कारण दुनिया के निशाने पर आए चीन को क्या वाकई खतरा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से इसी बात का इशारा किया गया है। उन्होंने सेना से कहा, ट्रेनिंग और जंग की तैयारियां तेज कर दें। सबसे मुश्किल हालात को ध्यान में रखते हुए खुद को तैयार करें। देश के आधिपत्य के लिए मजबूती से डटे रहें। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने मंगलवार को यह बात पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के डेलिगेशन की प्लेनरी मीटिंग में कही है।

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जिनपिंग ने कहा कि उलझे हुए मसलों को मुस्तैदी और असरदार तरीके से डील करें। उन्होंने किसी खतरे का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उनका बयान ऐसे समय आया है जब बॉर्डर पर चीन और भारत के जवानों के बीच तनाव बना हुआ है। चीन ने अपने 5000 जवान भारतीय बार्डर पर तैनात कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच कई बार सीमा विवाद और चीनी घुसपैठ को लेकर भारतीय सेना से झड़प और मारपीट भी हो चुकी है। इसे देखते हुए भारत ने भी अपनी सेना सीमा पर बढ़ाई है।

चीन ने रक्षा बजट 6.6% बढ़कार 179 अरब डॉलर का किया
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने डिफेंस में साइंटिफिक इनोवेशन पर जोर दिया। रक्षा खर्च पर उन्होंने कहा कि एक-एक पाई का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि ज्यादा से ज्यादा नतीजे मिलें। इससे पहले 22 मई को चीन ने अपना रक्षा बजट 6.6% बढ़ाकर 179 अरब डॉलर कर दिया। ये भारत के रक्षा बजट का करीब तीन गुना है। वहीं डिफेंस बजट बढ़ाने पर चीन के रक्षा प्रवक्ता वु क्यान ने कहा था कि इस समय हम नए खतरों और चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ताइवान का खास तौर से जिक्र किया, जिसने चीन का हिस्सा होने से इनकार कर दिया है।

सीमा विवाद/ एलएसी पर चीन के 5000 सैनिक मौजूद, भारत ने भी बढ़ाई संख्या; प्रधानमंत्री ने एनएसए, सीडीएस के साथ मीटिंग की, जारी रहेगा सड़क निर्माण

प्रधानमंत्री मोदी ने एनएसए, सीडीएस के साथ की थी हाईलेवल मीटिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई थी। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ) जनरल रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ चीन से तनाव के मामले पर लंबी समीक्षा बैठक कर चुके हैं। राजनाथ सिंह को सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने इस मामले की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी दी थी।

भारत ने खारिज किया था चीन का दावा, 5 मई को हुआ था विवाद
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने चीन के उस आरोप को खारिज किया था कि भारतीय सैनिकों की ओर से चीन की ओर अतिक्रमण करने की वजह से तनाव बढ़ा। भारत की यह प्रतिक्रिया चीन के उस आरोप के दो दिन बाद आई थी, जिसमें उसने कहा था कि भारतीय सेना ने उसके क्षेत्र में अतिक्रमण किया। भारतीय और चीनी सैनिक 5 मई को पैंगोंग सो झील इलाके में भिड़ गए थे और इस दौरान लोहे की छड़ों, लाठियों से एक दूसरे पर हमला और पथराव किया था। 9 मई को भी भारतीय और चीनी सैनिकों में सिक्किम सेक्टर के नाकुला पास में झड़प हुई थी। इससे पहले डोकलाम में 2017 में 73 दिनों तक तक दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने डटे हुए थे।

20 दिन में 6 बार बातचीत, हर बार कोई नतीजा नहीं
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पैंगोंग सो झील और गलवान घाटी में चीनी सेना तेजी से अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रही है। ऐसे में भारत भी चीन को करारा जवाब दे रहा है। भारत ने भी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की संख्‍या बढ़ा दी है। साथ ही निगरानी और गश्‍त भी कड़ी कर दी है। पांच मई से अब तक दोनों देशों के सैनिकों के बीच 6 बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन ये विफल रहीं। सूत्रों के मुताबिक चीन का कहना है कि भारत एलएसी पर अपने क्षेत्र में भी निर्माण कार्य नहीं करे। भारत ये मानने को तैयार नहीं है। भारत ने चीन से सीमा पर शांति बनाए रखने को कहा है। इसके बावजूद चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र से वापस नहीं जा रहे हैं।

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