कोरोना पर कांग्रेस/ राहुल गांधी ने कहा- देश में कोरोनावायरस फैल रहा है और लॉकडाउन हटाया जा रहा, बंद का मकसद फेल हुआ

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  • वीडियाे कॉफ्रेंसिंग के जरिए कांग्रेस सांसद ने कहा- लॉकडाउन फेल हुआ तो प्रधानमंत्री बैकफुट पर चले गए
  • दो माह में राहुल गांधी की चौथी प्रेस कॉफ्रेंस, दो बार नेशनल मीडिया, दो बार रीजनल मीडिया से की बात

नई दिल्ली. देश में कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण काे लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए मंगलवार को मीडिया से बात की। कहा, देश में कोरोनावायरस फैल रहा है, इसके बावजूद लॉकडाउन हटाया जा रहा है। लॉकडाउन का मकसद फेल हो चुका है और देश इसके नतीजे भुगत रहा है। राहुल गांधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी पर निशाना साधा। कहा कि चार फेज के लॉकडाउन के बाद भी वे नतीजे नहीं मिले जिनकी उम्मीद प्रधानमंत्री कर रहे थे।

कांग्रेस सांसद ने कहा, प्रधानमंत्री पहले फ्रंट फुट पर खेल रहे थे, लेकिन लॉकडाउन फेल हुआ तो बैकफुट पर चले गए। उन्हें फिर से फ्रंट फुट पर आना चाहिए। प्रधानमंत्री और उनके प्रमुख सलाहकारों ने कहा था कि मई के आखिर तक कोरोनावायरस का असर घटने लगेगा, लेकिन ऐसा तो नहीं हो रहा। अब सरकार बताए कि आगे क्या प्लान है? लॉकडाउन खोलने की स्ट्रैटजी में प्रवासियों और राज्यों की मदद के क्या इंतजाम किए गए हैं? लॉकडाउन के दो महीने में ये राहुल की चौथी प्रेस कॉफ्रेंस थी। इस दौरान उन्होंने दो बार नेशनल मीडिया और दो बार रीजनल मीडिया से बात की।

आम लोगाें व इंडस्ट्रीज को मदद नहीं मिली तो नतीजे खतरनाक होंगे
राहुल गांधी ने कहा, जो होना था वह नहीं हुआ। देश को मालूम होना चाहिए कि सरकार की क्या रणनीति है। लॉकडाउन को लागू हुए करीब 60 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन ये महामारी घटने के बजाय दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा, प्रवासी मजदूर परेशान हैं। सरकार उनकी परेशानियों और मुसीबतों को कैसे दूर करेगी? सरकार ने आर्थिक पैकेज में जो दिया, उससे कुछ नहीं होने वाला। लोगों, खासकर गरीबों के हाथों में पैसा पहुंचना जरूरी है। आम लोगों और इंडस्ट्री को अगर आर्थिक मदद नहीं मिली तो इसके नतीजे खतरनाक होंगे। उन्होंने कहा, केंद्र को राज्यों की भी मदद करनी चाहिए। इसके बिना कांग्रेस शासित प्रदेशों को दिक्कतें आएंगी।

यह राजनीति नहीं, बल्कि मेरी चिंता है
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, हमारा काम सरकार पर दबाव डालना है। मैंने फरवरी में ही कह दिया था कि हालात और खतरनाक होंगे। सरकार को आर्थिक मोर्चे पर बहुत काम करने की जरूरत है। सरकार को लोगों को कैश देना चाहिए। कम से कम 50 फीसदी गरीबों के खाते में 7500 रुपए महीना जमा कराए। उन्होंने कहा, पैकेज के बारे में कई प्रेस कॉफ्रेंस हुईं। हमें बहुत उम्मीदें थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जीडीपी का 10 प्रतिशत होगा। वास्तविकता यह है कि ये जीडीपी के 1 फीसदी से भी कम है और उसमें भी ज्यादातर लोन है, नकद नहीं। ये राजनीति नहीं है, बल्कि मेरी चिंता है।

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